सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड मामले पर SBI को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
सुप्रीम न्यायालय के आदेश के बाद भारतीय चुनाव आयोग ने 14 मार्च को चुनावी बॉन्ड से जुड़े डेटा को जारी किया था। चुनावी बॉन्ड यानी इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ा डेटा वही डेटा है जिसे चुनाव आयोग के साथ 12 मार्च को एसबाआई ने शेयर किया था। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर 2 लिस्ट जारी किए गए हैं। इसमें कुल 763 पन्ने हैं जिनमें चुनावी बॉन्ड खरीदने वाली कंपनियों और लोगों के नाम शामिल हैं। इस मुद्दे में उच्चतम न्यायालय ने अब स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया को नोटिस जारी कर उत्तर मांगा है। उच्चतम न्यायालय ने वेबसाइट पर अपलोड किए जाने वाले डेटा को वापस करने को लेकर ईसीआई के निवेदन को अनुमति दे दी है।

सुप्रीम न्यायालय ने मांगा जवाब
सुप्रीम न्यायालय ने बोला कि शीर्ष न्यायालय के ज्यूडिशियल रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करें कि डॉक्यूमेंट्स को स्कैन और डिजिटल किया जाए और बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस्तावेजों को ईसीआई को वापस दे दिया जाए। वह इसे 17 मार्च को या उससे पहले वेबसाइट पर अपलोड कर देगा। बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में सोमवार तक एसबीआई से उत्तर मांगा है। बता दें कि उच्चतम न्यायालय के कठोर आदेश के बाद एसबीआई ने बुधवार को भारतीय निर्वाचन आयोग को इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा सौंपा था। आदेश के अनुसार गुरुवार को ही चुनाव आयोग ने इस डेटा को अपनी वेबसाइट पर अपोलड कर दिया है। हालांकि इसमें किसी भी बॉन्ड का यूनिक नंबर नहीं दिया गया है।
एसबीआई को मिला 18 मार्च तक का समय
बता दें कि इस मुद्दे की सुनवाई के दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली कानूनी पीठ ने स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया से बोला कि हमारा साफ निर्देश था। हमने इलेक्टोरल बॉन्ड से संबंधित पूरा ब्योरा देने को बोला था। लेकिन यूनिक नंबर की जानकारी साझा नहीं की गई है। इसकी जानकारी एसबाई को तुरंत देनी होगी। बता दें कि यूनिक नंबर की जानकारी साझा करने के लिए एसबीआई को 18 मार्च तक का समय दिया गया है। बता दें कि चुनाव आयोग द्वारा 2 लिस्ट जारी की गई है। एक लिस्ट में बॉन्ड खरीदने वालों के नाम और दूसरी लिस्ट में बॉन्ड की राशि देने वाली पार्टियों के नाम शामिल हैं।
क्या होता है यूनिक आईडी?
दरअसल न्यायालय ने एसबीआई को बोला है कि बॉन्ड खरीदने वाले और उन्हें प्राप्त करने वाली पार्टियों की पूरी जानकारी को यूनिक आईडी के साथ शेयर किया जाए। दरअशल यूनिक आईडी हर एक बॉन्ड का यूनिक नंबर होता है। इके जरिए सरलता से यह पता लगाया जा सकेगा कि आखिर किस कंपनी या आदमी ने किस पार्टी को चंदा दिया है। चंदा देने वाले और चंदा पाने वालों की सभी जानकारी एक ही जगह पर मौजूद रहेगी। इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय का बोलना है कि बॉन्ड नंबरों से पता चल सकेगा कि किस दानदाता ने किस पार्टी को कितना चंदा दिया है। बता दें कि इस मुद्दे में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।

