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 सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की मनमानी बुलडोजर एक्शन पर लगाई रोक

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नई दिल्ली: बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम न्यायालय का निर्णय आ गया है. 2 जजों की बेंच ने ये फैसला सुनाया है. सुप्रीम न्यायालय ने गवर्नमेंट की मनमानी कार्रवाई पर रोक लगाई है और बोला है कि मनमाने ढंग से घर गिराना कानून का उल्लंघन है.Download 11zon 2024 11 13t145505. 026

सुप्रीम न्यायालय ने बोला कि राज्यों में कानून का राज होना चाहिए. किसी की संपत्ति मनमाने ढंग से नहीं ले सकते. यदि कोई गुनेहगार भी है तो भी कानूनन ही घर गिरा सकते हैं. आरोपी और गुनेहगार होना घर तोड़ने का आधार नहीं है.

मनमानी कार्रवाई करने पर नपेंगे अधिकारी

सुप्रीम न्यायालय ने बोला कि मनमाने ढंगे से संपत्ति पर बुलडोजर चलवाने पर अधिकारी जवाबदेह होंगे. यदि किसी अधिकारी ने मनमानी गैरकानूनी कार्रवाई की तो उसे दंडित किया जाएगा. क्राइम की सजा देना न्यायालय का काम है. अभियुक्तों और दोषियों के पास भी कुछ अधिकार हैं. केवल आरोपी होने पर घर गिराना कानून का उल्लंघन है.

SC ने मुआवजा देने की बात कही

सुप्रीम न्यायालय ने बोला है कि यदि किसी शख्स का मनमाने ढंग से मकान गिराया तो मुआवजा मिलना चाहिए. कानूनी प्रक्रिया के बिना बुलडोजर चलाना गैरकानूनी है. किसी एक की गलती की सजा पूरे परिवार को नहीं दे सकते. आरोपी एक है तो पूरे परिवार से घर क्यों छीना जाए?

नोटिस, 15 दिन का समय और आरोपी का पक्ष सुनने की भी बात

सुप्रीम न्यायालय ने बोला कि बुलडोजर एक्शन से पहले आरोपी का पक्ष सुना जाए. नियमों के अनुसार नोटिस जारी हो. रजिस्टर्ड डाक से नोटिस भेजा जाए और मकान पर चिपकाया जाए. कार्रवाई से पहले 15 दिन का समय मिले. नोटिस की जानकारी जिलाधिकारी को भी दी जाए. आरोपी को गैरकानूनी निर्माण हटाने का मौका मिले.

कब लागू नहीं होंगे निर्देश?

सुप्रीम न्यायालय ने बोला कि यदि सार्वजनिक भूमि पर कब्जा है तो निर्देश लागू नहीं होंगे.  तोड़फोड़ की कार्रवाई की वीडियोग्राफी होगी. लोगों को स्वयं गैरकानूनी निर्माण हटाने का मौका मिलना चाहिए. सुप्रीम न्यायालय ने बोला कि ध्वस्तीकरण का आदेश डिजिटल पोर्टल पर डाला जाए. इस आदेश के विरुद्ध अपील का समय मिले. बिना कारण बताओ नोटिस के बुलडोजर ना चले.

सुप्रीम न्यायालय ने  अनुच्छेद 142 के अनुसार निर्देश जारी किए

  1. यदि ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया जाता है, तो इस आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए समय दिया जाना चाहिए.
  2. बिना अपील के रातभर ध्वस्तीकरण के बाद स्त्रियों और बच्चों को सड़कों पर देखना सुखद दृश्य नहीं है.
  3. बिना कारण बताओ नोटिस के ध्वस्तीकरण नहीं.
  4. मालिक को दर्ज़ डाक द्वारा नोटिस भेजा जाएगा और संरचना के बाहर चिपकाया जाएगा.
  5. नोटिस से 15 दिनों का समय नोटिस तामील होने के बाद का होगा.
  6. तामील होने के बाद कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सूचना भेजी जाएगी.
  7. कलेक्टर और डीएम नगरपालिका भवनों के ध्वस्तीकरण आदि के प्रभारी नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे.
  8. नोटिस में उल्लंघन की प्रकृति, पर्सनल सुनवाई की तिथि और किसके समक्ष सुनवाई तय की गई है, निर्दिष्ट डिजिटल पोर्टल मौजूद कराया जाएगा, जहां नोटिस और उसमें पारित आदेश का विवरण मौजूद होगा.
  9. प्राधिकरण पर्सनल सुनवाई करेगा और सारे मिनट को रिकॉर्ड किया जाएगा और उसके बाद आखिरी आदेश पारित किया जाएगा/  इसमें यह उत्तर दिया जाना चाहिए कि क्या गैरकानूनी निर्माण समझौता योग्य है, और यदि सिर्फ़ एक भाग समझौता योग्य नहीं पाया जाता है और यह पता लगाना है कि विध्वंस का उद्देश्य क्या है.
  10. आदेश डिजिटल पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा.
  11. आदेश के 15 दिनों के भीतर मालिक को अनधिकृत संरचना को ध्वस्त करने या हटाने का अवसर दिया जाएगा और सिर्फ़ तभी जब अपीलीय निकाय ने आदेश पर रोक नहीं लगाई है, तो विध्वंस स्टेप वाइज होंगे.
  12. विध्वंस की कार्यवाही की वीडियोग्राफी की जाएगी. वीडियो को संरक्षित किया जाना चाहिए. उक्त विध्वंस रिपोर्ट नगर आयुक्त को भेजी जानी चाहिए.
  13. सभी निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए और इन निर्देशों का पालन न करने पर अवमानना और अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी और ऑफिसरों को मुआवजे के साथ ध्वस्त संपत्ति को अपनी लागत पर वापस करने के लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा.
  14. इस मुद्दे का सभी मुख्य सचिवों को निर्देश दिए जाने चाहिए.

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