भयावह विमान हादसे में 40 वर्षीय रमेश विश्वास कुमार ने मौत को दिया मात
Ahmedabad Plane Crash Latest Survivor News : गुजरात के अहमदाबाद में एक भयावह विमान हादसे ने पूरे राष्ट्र को हिलाकर रख दिया। एयर इण्डिया की फ्लाइट AI-171, जो अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भर रही थी, टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद मेघानीनगर के रिहायशी क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर में 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर सवार थे। आग का गोला बन चुके विमान के मलबे में किसी के जिंदा बचने की आशा नहीं थी, लेकिन 40 वर्षीय रमेश विश्वास कुमार ने मृत्यु को मात देकर एक करिश्मा रच दिया। तबाही और मातम के बीच एक मात्र जिंदा आदमी बचकर बाहर निकल आया।
रमेश, जो सीट नंबर 11A पर बैठे थे, एक ब्रिटिश नागरिक हैं और पिछले 20 वर्ष से लंदन में रह रहे हैं। वह अपने भाई अजय कुमार रमेश के साथ हिंदुस्तान में परिवार से मिलने आए थे। हादसे के बाद रमेश ने मीडिया को बताया, “टेकऑफ के 30 सेकंड बाद एक जोरदार धमाका हुआ। विमान हवा में लड़खड़ाया और फिर धड़ाम से जमीन पर गिर गया। जब मेरी आंख खुली, तो चारों तरफ लाशें और मलबा था। मैं डर गया, लेकिन किसी तरह सीट से निकला और जलते मलबे से बाहर भागा।” उनके चेहरे और पैरों पर गंभीर चोटें थीं, फिर भी वह लंगड़ाते हुए मौके से बाहर निकले।
रमेश अहमदाबाद में हुए भयंकर एयर इण्डिया विमान हादसे में चमत्कारिक रूप से जिंदा बच गए हैं।
कौन हैं रमेश विश्वास जो जिंदा बच गए?
रमेश का यह बचाव किसी दैवीय करिश्मा से कम नहीं है। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, रमेश और एक अन्य यात्री ही इस हादसे में जिंदा बचे। दूसरा यात्री हॉस्पिटल में है, लेकिन रमेश का वीडियो, जिसमें वह मलबे से निकलकर चलते हुए नजर आ रहे हैं, सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोगों ने इसे “मुकद्दर का सिकंदर” करार दिया। रमेश ने कहा, “मुझे नहीं पता कैसे बचा, शायद ऊपरवाले की मर्जी थी। मैं अपने भाई को ढूंढना चाहता हूं, वो मेरे साथ था।”
चमत्कार को नमस्कार
यह दुर्घटना हिंदुस्तान के सबसे खतरनाक विमान हादसों में से एक है, जिसमें 242 लोगों में से अधिकतर की मृत्यु हो गई। प्रारंभिक जांच में इंजन की तकनीकी खराबी को कारण कहा जा रहा है। रमेश की कहानी ने लोगों को दंग कर दिया। एक क्षेत्रीय निवासी ने कहा, “विमान आग का गोला बन गया था, कोई कैसे बच सकता है? यह भगवान का करम है।”
रमेश का यह बचाव विश्व के उन दुर्लभ मामलों की याद दिलाता है, जहां विमान हादसों में लोग चमत्कारिक रूप से बच गए। जैसे 2009 में यमनिया फ्लाइट 626 की बहिया बकरी, जो हिंद महासागर में गिरने के बाद अकेली बची थीं। रमेश की कहानी न सिर्फ़ उनके साहस की गवाही देती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि विपदा में भी आशा की किरण बाकी रहती है। फिलहाल, रमेश अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में इलाजरत हैं, और राष्ट्र उनकी सलामती की दुआ कर रहा है।

