राष्ट्रीय

डेपसांग और डेमचोक से 50 फीसदी सेना ने पीछे हटाए अपने कदम

भारत और चीन के बीच करीब 4 वर्ष बाद हालात सामान्य होते दिखाई दे रहे हैं. पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव को कम करने के लिए दोनों राष्ट्रों ने बड़ा समझौता किया है. इस समझौते के अनुसार दोनों राष्ट्रों की सेनाएं वर्ष 2020 की स्थिति में वापस जाएंगी और बॉर्डर पर डिसइंगेजमेंट किया जाएगा. अब हिंदुस्तान और चीन के बीच इस समझौते का असर जमीन पर दिखाई पड़ने लगा है. जानकारी के मुताबिक, पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग में अब तक 50 प्रतिशत डिसइंगेजमेंट पूरा हो गया है. दोनों राष्ट्रों की ओर से सेनाएं पीछे हटाई गई हैं.

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दिवाली से पेट्रोलिंग की संभावना

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, डेमचोक और देपसांग में हिंदुस्तान और चीन की सेनाओं के बीच 28-29 अक्टूबर तक डिसइंगेजमेंट पूरा हो जाएगा. बताया जा रहा है कि दीपावली से डेपसांग और डेमचोक में पेट्रोलिंग प्रारम्भ हो सकती है. उदाहरण के तौर पर डेमचोक और देपसांग के भिन्न-भिन्न इलाकों में सैनिक 2 से 10 किमी की दूरी तक जाएंगे.

दोनों राष्ट्र एक दूसरों के कमांडर्स को पेट्रोलिंग के दौरान जवानों की संख्या बताएंगे. हॉटलाइन पर वार्ता करेंगे. लांग रेंज पेट्रोलिंग और शॉर्ट रेंज पेट्रोलिंग की पूरी जानकारी और समय एक दूसरे को बताई जाएगी ताकि विश्वास बन सके. एक महीने में ये दो बार या उससे ज़्यादा भी हो सकता है. दोनों राष्ट्र अपने जवानों को अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति के अनुसार पचास फीसदी तक पहुंच चुके हैं और अभी और ला रहे हैं.

दोनों राष्ट्र आपस में लोकल लेवल पर भी वार्ता करेंगे में वार्ता करेंगे. टेंट हटाने के बाद और अपने फॉरवर्ड बेस को डेम चौक और डेपसांग से पीछे की तरफ ले जाएंगे और ये दूरी एक सीमित दूरी के तौर पर होगी. उदाहरण के लिए कहीं ये दो किलोमीटर भी हो सकती है और उससे ज़्यादा भी. दोनों राष्ट्र एक दूसरे की भिन्न भिन्न तकनीकी साधनों से नज़र करेंगे और जो दोनों के बीच म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग है उसका पालन करेंगे. इन दोनों इलाकों में जवानों की संख्या में कमी कर दी गई है और उन्हें दोनों तरफ़ पीछे ले जाया गया है.

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