छत्तीसगढ़ में सामने आया धर्मांतरण का बड़ा मामला, दर्ज हुई FIR
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक चंगाई सभा के दौरान हिंदू देवी-देवताओं पर कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी किए जाने के बाद हंगामा मच गया. इल्जाम है कि इस सभा में धर्मांतरण कराने की प्रयास हो रही थी, जिसे लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध जताया. टकराव बढ़ने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पादरी कीर्ति कुमार केशरवानी और उनके दो सहयोगियों महारथी बंजारे और जीवन लाल साहू को अरैस्ट कर लिया.

घटना रायपुर के पंडरी थाना क्षेत्र के मितान विहार की है. 26 जनवरी को हिंदू संगठनों को सूचना मिली कि एक मकान में गुप्त रूप से चंगाई सभा आयोजित की जा रही है, जहां लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. साथ ही, हिंदू देवी-देवताओं की तुलना ईसा मसीह से कर उन्हें छोटा कहा जा रहा था. इस सूचना पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और सभा में हो रही गतिविधियों का विरोध करने लगे. हंगामे की समाचार मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मुद्दे को शांत कराया. सिटी एडिशनल एसपी लखन पटले के निर्देश पर जांच के बाद पादरी और उनके दो सहयोगियों को अरैस्ट कर लिया गया.
स्थानीय लोगों का बोलना है कि पादरी कीर्ति कुमार केशरवानी पिछले नौ वर्षों से इसी क्षेत्र में रह रहे थे और उन्होंने अपने किराए के मकान को अस्थायी चर्च में बदल दिया था. इल्जाम है कि हर रविवार को वहां प्रार्थना सभा के नाम पर हिंदू परिवारों को बुलाया जाता था और उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता था. पुलिस को दी गई कम्पलेन के मुताबिक, पादरी और उनके साथी गरीब और बीमार लोगों को यह कहकर धर्मांतरण के लिए तैयार करते थे कि ईसा मसीह की शरण में आने से उनकी सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी. कहा जा रहा है कि घटना वाले दिन भी चार हिंदू परिवारों का धर्मांतरण कराया जा रहा था. माया अग्रवाल नामक स्त्री ने पंडरी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई है. कम्पलेन में इल्जाम लगाया गया है कि पादरी कीर्ति कुमार केशरवानी और उनके सहयोगी धर्म बदलाव के लिए प्रलोभन दे रहे थे और हिंदू धर्म के विरुद्ध अपमानजनक बातें कह रहे थे. सिविल लाइन सीएसपी अजय कुमार ने कहा कि तीनों आरोपियों के विरुद्ध धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धर्मांतरण कानून के उल्लंघन के अनुसार मुद्दा दर्ज किया गया है.
इस मुद्दे पर अखिल भारतीय घर वापसी अभियान के प्रमुख और जशपुर राजघराने के सदस्य प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे “सांस्कृतिक आतंकवाद” करार देते हुए बोला कि धर्मांतरण के विरुद्ध कठोर कानून बनाना महत्वपूर्ण है. उन्होंने इल्जाम लगाया कि विदेशी फंडिंग के जरिए मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा है और इसे रोकना महत्वपूर्ण है.
वहीं, छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने इसे षड्यंत्र बताते हुए बोला कि ईसाई समाज को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि बिना किसी ठोस सबूत के कार्रवाई की गई है और वे इस मुद्दे को लेकर न्यायालय का रुख करेंगे. फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को अरैस्ट कर लिया है और मुद्दे की जांच जारी है. क्षेत्र में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. प्रशासन का बोलना है कि कानून प्रबंध बनाए रखने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे.

