भारत में जानलेवा वायरसों के लिए एक खास मोबाइल लैब का किया जा रहा इस्तेमाल
नई दिल्ली। हिंदुस्तान अब जानलेवा वायरसों से लड़ाई के लिए एक खास तरह की मोबाइल लैब का इस्तेमाल कर रहा है जिसे कहीं भी तैनात किया जा सकता है। इस मोबाइल बीएसएल-3 लैब को भारतीय काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और मुंबई की क्लेंज़ाइड्स कंपनी ने मिलकर तैयार किया है। यह लैब दुर्गम इलाकों में भी पहुंचकर घातक वायरसों की तुरंत जांच कर सकती है।

निपाह वायरस के दौरान दिखी इसकी ताकत: इस तकनीक की पहली बार तैनाती केरल के कोझिकोड में 2023 और मलप्पुरम में 2024 में निपाह वायरस फैलने के समय की गई थी। इससे वहीं पर सैंपल लेकर जांच करना संभव हुआ और समय पर कार्रवाई की जा सकी।
क्या है मोबाइल बीएसएल-3 लैब? यह एक भारी वाहन (लगभग 17 टन) पर बनी हाईटेक लैब है जिसे हिंदुस्तान बेंज ट्रक पर तैयार किया गया है। यह लैब विश्व स्वास्थ्य संगठन की टाइप-IV रैपिड रिस्पॉन्स लैब’ की श्रेणी में आती है और इसमें वायरस से बचाव के लिए हर आवश्यक तकनीक उपस्थित है।
लैब के अंदर चार ज़ोन होते हैं: 1. ड्राइवर और बाहर बदलने का कमरा, 2. शॉवर और अंदर जाने से पहले बदलने का कमरा, 3. मुख्य लैब, जहां जांच होती है और 4. डिकंटैमिनेशन और तैयार होने का हिस्सा।
लैब में क्या-क्या सुविधाएं हैं?
वायरस से सुरक्षा के लिए HEPA फिल्टर और निगेटिव एयर प्रेशर सिस्टम
जैविक कचरे के सुरक्षित निपटान की तकनीक
अंदर आने के लिए बायोमेट्रिक शॉवर एंट्री
बिजली की तीन स्रोतों से सप्लाई: डायरेक्ट, जेनरेटर और UPS
टीम के बीच संपर्क के लिए वॉकी-टॉकी और CCTV
आगे क्या योजना है? इस समय ऐसी दो मोबाइल लैब पुणे और गोरखपुर में उपस्थित हैं। ICMR जल्द ही दो और लैब तैयार कर रहा है ताकि किसी भी वायरस के प्रकोप के समय राष्ट्र के किसी भी हिस्से में तुरंत जांच की जा सके।
आत्मनिर्भर हिंदुस्तान की मिसाल: रामबाण नाम की यह लैब आयुष्मान हिंदुस्तान हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के अनुसार बनाई गई है। यह न सिर्फ़ हमारी तकनीकी क्षमता को दिखाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि हिंदुस्तान अब वायरसों के विरुद्ध और अधिक तैयार है।

