राजगीर-हरिद्वार के बीच दौड़ेगी 12 स्लीपर कोच वाली साप्ताहिक ट्रेन, 26 दिसंबर तक रहेगी सेवा
बख्तियारपुर-राजगीर रेल खंड पर यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों और आम यात्रियों के लिए रेलवे ने एक जरूरी घोषणा की है. बिहार के मशहूर धार्मिक स्थल राजगीर से उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ नगरी हरिद्वार के बीच एक बार फिर विशेष रेलगाड़ी संचालित की जाएग
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यह रेल सेवा विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए वरदान साबित होगी, जो मां गंगा के दर्शन और हरिद्वार की पावन धरती पर पहुंचना चाहते हैं. यह विशेष ट्रेन 10 अक्टूबर से 26 दिसंबर तक साप्ताहिक आधार पर संचालित की जाएगी.
गाड़ी संख्या 03223 राजगीर-हरिद्वार स्पेशल प्रत्येक शुक्रवार को राजगीर से सुबह 4:05 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 5:55 बजे हरिद्वार पहुंचेगी. इस प्रकार यात्रियों को लगभग 26 घंटे की यात्रा करनी होगी.
वापसी यात्रा के लिए भी समुचित प्रबंध की गई है. गाड़ी संख्या 03224 हरिद्वार-राजगीर स्पेशल प्रत्येक शनिवार को हरिद्वार से सुबह 7:20 बजे रवाना होगी और अगले दिन यानी रविवार को सुबह 7:15 बजे राजगीर पहुंचेगी.
रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेन में विभिन्न श्रेणियों के कोच मौजूद कराए हैं. ट्रेन में कुल 6 जनरल श्रेणी के कोच, 12 स्लीपर क्लास, 2 एसी थ्री टियर, 2 एसी टू टियर और 2 जीएसएलआरडी (गार्ड्स-कम-लगेज ब्रेक वैन) बोगियां होंगी. यह प्रबंध विभिन्न आर्थिक स्तर के यात्रियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए की गई है.
मार्ग और ठहराव
यह ट्रेन बिहार और यूपी के कई जरूरी शहरों और तीर्थ स्थलों से होकर गुजरेगी. राजगीर से खुलने के बाद यह ट्रेन नालंदा, पावापुरी रोड, बिहार शरीफ, बेना, हरनौत, फतुहा, पटना साहिब, पटना जंक्शन, दानापुर, आरा, बक्सर जैसे बिहार के प्रमुख स्टेशनों पर ठहरेगी.
इसके बाद यह डीडीयू वाराणसी, जौनपुर, अयोध्या धाम, लखनऊ, शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद, नजीबाबाद और लक्सर होते हुए अंततः हरिद्वार पहुंचेगी. इस मार्ग की खासियत यह है कि यह कई धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों को जोड़ती है.
तीर्थयात्रियों के लिए वरदान
यह विशेष रेलगाड़ी विशेष रूप से उन तीर्थयात्रियों के लिए जरूरी है जो राजगीर जैसे बौद्ध और जैन धर्म के पवित्र स्थल की यात्रा के साथ-साथ हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ हरिद्वार भी जाना चाहते हैं. पावापुरी, नालंदा, पटना साहिब, वाराणसी, अयोध्या और हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली यह ट्रेन एक प्रकार से तीर्थ परिपथ का निर्माण करती है.
अक्टूबर से दिसंबर का समय तीर्थयात्रा के लिए अनुकूल माना जाता है. इस अवधि में न तो अत्यधिक गर्मी होती है और न ही सर्दी. कार्तिक और मार्गशीर्ष माह में गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है, ऐसे में यह रेलसेवा श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी.

