Accident Compensation: हाई कोर्ट ने दुर्घटना मुआवजे से जुड़े इन नियमों पर डाला प्रकाश
Accident Compensation Rules: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने साफ किया है कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 163A के अनुसार मुआवजा “नो-फॉल्ट लायबिलिटी” के सिद्धांत पर आधारित होता है. यानी सड़क हादसा के पीड़ितों को मुआवजा पाने के लिए ढिलाई साबित करने की आवश्यकता नहीं है.

न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर और न्यायमूर्ति कीर्ति सिंह की खंडपीठ ने एक मुद्दे की सुनवाई के दौरान यह निर्णय सुनाया. मुद्दा एक ऐसे सड़क हादसे से जुड़ा था, जिसमें एक ट्रैक्टर सड़क के बीच बिना किसी चेतावनी संकेत के खड़ा था.
अदालत ने मुआवजे की गणना से जुड़े कानूनी प्रावधानों की समीक्षा करते हुए साफ किया कि धारा 163A के अनुसार दावे के लिए “अपराधी” वाहन के चालक की गलती साबित करना जरूरी नहीं है.
अदालत ने बोला कि इस धारा के अनुसार मुआवजा एक निश्चित संरचित फॉर्मूले के आधार पर दिया जाता है, जो अधिनियम के दूसरे अनुसूची में उल्लिखित है. अन्य सड़क हादसा मुआवजा दावों में इस्तेमाल होने वाली “मल्टीप्लायर विधि” की जरूरत यहां नहीं होती. साथ ही, धारा 140 के अनुसार वाहन मालिक को बिना किसी गलती के मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी माना जाएगा.
बीमा कंपनी की आपत्तियों को खारिज करते हुए, न्यायालय ने यह भी बोला कि यदि चिकित्सा खर्च के लिए उचित बिल मौजूद हैं, तो इसे चुनौती नहीं दी जा सकती. इसके अलावा, यदि “नो-फॉल्ट” सिद्धांत के अनुसार पहले ही मुआवजा दिया जा चुका है, तो इसे अधिनियम की अन्य धाराओं के अनुसार किए गए अतिरिक्त दावों में समायोजित किया जाना चाहिए.
इस निर्णय के साथ, उच्च न्यायालय ने हादसा पीड़ित को मुआवजा देने के निचली न्यायालय के फैसला को बरकरार रखा. न्यायालय ने दोहराया कि मोटर वाहन अधिनियम का उद्देश्य हादसा पीड़ितों को न्यायसंगत मुआवजा प्रदान करना है और कानून की व्याख्या इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए.

