राष्ट्रीय

साइबर अपराध पर नियंत्रण करने के लिए एडीजी जोन ने दिए कड़े निर्देश

बढ़ते साइबर अपराधों पर कारगर रोकथाम और अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एडीजी जोन अशोक मुथा जैन ने गुरुवार शाम सभी जिलों के ऑफिसरों को कठोर गाइड लाइन दिए. उन्होंने साफ बोला कि साइबर क्राइम से जुड़े मामलों में पहले 24 घंटे बहुत अहम होते हैं, ऐसे में किसी भी स्तर पर टालमटोल बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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ऑनलाइन बैठक में दिए निर्देश

एडीजी जैन ने यह निर्देश जोन के सभी जिलों के साइबर नोडल अधिकारी, साइबर थाना/सेल प्रभारी और कर्मचारियों के साथ आयोजित औनलाइन बैठक में दिए. उन्होंने बोला कि साइबर ठगी के मामलों में पीड़ित की सूचना मिलते ही तुरन्त कार्रवाई करें और संबंधित बैंक, ई-वॉलेट या अन्य एजेंसियों से संपर्क साधकर ठगों के खाते को फ्रीज करवाने की प्रयास की जाए.

“समय गंवाना मतलब आरोपी को मौका देना”

अशोक मुथा जैन ने बोला कि साइबर क्रिमिनल तकनीकी ढंग से पैसे को पलभर में इधर-उधर कर देते हैं. ऐसे में यदि आरंभ के कुछ घंटे गंवा दिए जाएं तो आरोपी तक पहुंचना कठिन हो जाता है. उन्होंने ऑफिसरों को चेतावनी देते हुए बोला कि ढिलाई बरतने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और सख्त कार्रवाई होगी.

जागरूकता अभियान भी चलाने पर जोर

एडीजी ने बोला कि साइबर क्राइम पर नकेल कसने के लिए पुलिस की सक्रियता के साथ-साथ जनजागरूकता भी बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में साइबर सुरक्षा से जुड़े जागरूकता अभियान चलाए जाएं. स्कूल, कॉलेज, पंचायत और शहरी निकायों के स्तर पर लोगों को यह कहा जाए कि वे अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी साझा न करें और कॉल पर पर्सनल जानकारी न दें.

तकनीकी दक्षता बढ़ाने की आवश्यकता

बैठक में ऑफिसरों को यह भी कहा गया कि साइबर क्राइम से निपटने के लिए लगातार तकनीकी दक्षता बढ़ाना समय की मांग है. इसके लिए साइबर सेल के कर्मचारियों को नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा. साथ ही, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर आई शिकायतों पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाएगी.

हाल के मामलों पर चर्चा

बैठक में हाल ही में सामने आए कुछ बड़े साइबर ठगी के मामलों की समीक्षा भी की गई. इनमें यह पाया गया कि समय पर कार्रवाई करने से कई मामलों में ठगों के खाते फ्रीज हो सके और पीड़ित की धनराशि वापस दिलाई जा सकी. वहीं, देरी होने पर आरोपी धनराशि निकालने में सफल हो गए. इन उदाहरणों का हवाला देते हुए एडीजी जैन ने बोला कि पुलिस को हर कम्पलेन को ‘इमरजेंसी’ की तरह लेना होगा.

अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई

एडीजी ने यह भी निर्देश दिया कि जिन जिलों में साइबर अपराधियों की पहचान हो चुकी है, वहां गिरफ्तारी की रफ्तार तेज की जाए. इसके अलावा, ऐसे मामलों में चार्जशीट समय पर दाखिल कर न्यायालय में पुख्ता साक्ष्य पेश किए जाएं ताकि आरोपियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके.

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