200 घंटे की मेहनत और 300 द्विपक्षीय बैठकों के बाद भारत ने रचा इतिहास
नई दिल्ली के जी-20 शिखर सम्मेलन में यूक्रेन संघर्ष पर घोषणापत्र पर आम सहमति बनाने के लिए हिंदुस्तान ने कूटनीति का लोहा मनवा दिया। एक तरफ यूरोप और पश्चिमी राष्ट्र तो दूसरी तरफ चीन और रूस अपनी जिद पर अड़े थे। यूरोप और पश्चिमी राष्ट्र यूक्रेन पर हमले के लिए जी-20 से रूस की कड़ी निंदा और उसे अपनी सेना वापस बुलाने के लिए घोषणापत्र जारी करवाना चाह रहे थे तो दूसरी तरफ रूस और चीन इस मामले पर जरा भी कठोर संदेश को खारिज करने की जिद पर अड़े थे। मगर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर नामुमिकन को संभव में बदल कर दिखाया। अंतिम समय में जी-20 घोषणा पत्र पर आम सहमति बना ली गई। इसके बाद कैबिनेट मंत्रियों में मोदी है तो संभव है की चर्चा फिर प्रारम्भ हो गई। जी-20 डिक्लेरेशन पास होने से हिंदुस्तान का सिर गर्व से दुनिया के सामने ऊंचा हो गया।

मगर इसके लिए हिंदुस्तान की एक टीम ने लगातार 200 घंटे से अधिक समय तक बैठकें की और सहमति का रास्ता खोजा। हिंदुस्तान के जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने रविवार को बोला कि यहां ‘लीडर्स समिट’ में अपनाए गए ‘जी20 डिक्लेरेशन’ (घोषणापत्र) पर आम सहमति बनाने के लिए भारतीय राजनयिकों के एक दल ने 200 घंटे से भी अधिक समय तक लगातार वार्ता की। इतना ही नहीं, संयुक्त सचिव ई गंभीर और के नागराज नायडू समेत राजनयिकों के एक दल ने इसके लिए 300 द्विपक्षीय बैठकें कीं। ‘जी20 लीडर्स समिट’ के पहले दिन ही सर्वसम्मति बनाने के लिए विवादास्पद यूक्रेन संघर्ष पर अपने समकक्षों को 15 मसौदे वितरित किए।
200 घंटे की मेहनत और 300 द्विपक्षीय बैठकों के बाद हिंदुस्तान ने रचा इतिहास
आखिरकार लगातार 200 घंटे में 300 द्विपक्षीय बैठकों को करने के बाद हिंदुस्तान उस मुकाम तक पहुंच गया, जहां पहुंचने की आसार जी-20 राष्ट्रों को नहीं थी। अमिताभ कांत ने कहा, ‘‘पूरे जी20 शिखर सम्मेलन का सबसे जटिल हिस्सा भूराजनीतिक पैराग्राफ (रूस-यूक्रेन) पर आम सहमति बनाना था। यह 200 घंटे से अधिक समय तक लगातार बातचीत, 300 द्विपक्षीय बैठकों, 15 मसौदों के साथ किया गया।’’ कांत ने बोला कि इस कोशिश में नायडू और गंभीर ने उनका काफी योगदान किया। हिंदुस्तान इस विवादित मामले पर जी20 राष्ट्रों के बीच अभूतपूर्व आम सहमति बनाने में सफल रहा और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं जैसे कि ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया ने इसमें अग्रणी किरदार निभाई।
ऐसे बनी सहमति
‘जी20 लीडर्स डिक्लेरेशन’ में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का उल्लेख करने से बचा गया और इसके बजाय सभी राष्ट्रों से एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुत्ता के सिद्धांतों का सम्मान करने का आह्वान किया गया। घोषणापत्र में बोला गया है, ‘‘हम सभी राष्ट्रों से क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता, अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून एवं शांति तथा स्थिरता की रक्षा करने वाली बहुपक्षीय प्रणाली सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को बनाए रखने का आह्वान करते हैं।’

