आखिर मिल ही गए RTO के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा…
भोपाल. लोकायुक्त, इनकम टैक्स और प्रवर्तन निदेशालय समेत अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई में करोड़ों की काली कमाई के आसामी निकले आरटीओ के पूर्व कॉस्टेबल सौरभ शर्मा ने आज भोपाल में सरेंडर कर दिया है. उल्लेखनीय है कि सौरभ शर्मा के ठिकानों पर पिछले वर्ष 17 दिसंबर को लोकायुक्त ने छापा मारा था. छापे के बाद सौरभ शर्मा फरार था और उसके दुबई में होने की जानकारी सामने आ रही थी. आज सौरभ शर्मा ने अपने वकील के साथ भोपाल में स्पेशल न्यायालय में पहुंचकर सरेंडर कर दिया.

सात वर्ष में करोड़ों की काली कमाई- आरटीओ के पूर्व कॉस्टेबल सौरभ शर्मा ने सात वर्ष की जॉब में करोड़ों की काली कमाई का साम्राज्य खड़ा किय़ा था. भोपाल में रहने वाले पूर्व ट्रांसपोर्ट कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के ठिकानों पर जब पिछले दिनों लोकायुक्त और आयकर की टीम ने कार्रवाई की तो काली कमाई का जखीरा देखकर ऑफिसरों के भी होश उड़ गए. अब तक की कार्रवाई में सौरभ शर्मा के ठिकानों से 3 करोड़ रुपए की नगदी,50 लाख रुपए का सोना,दो क्विटंल चांदी की सिल्ली, चांदी के 10 किलो जेवर मिले है. इसके साथ भोपाल में एक निर्माणाधीन बंगला और एक विद्यालय , भोपाल, इंदौर और ग्वालियर शहरों में प्रॉपर्टी और घर में नोट गिनने की सात मशीन मिली. सौरभ शर्मा ने महज सात वर्ष ही जॉब में करोड़ों की काली कमाई का साम्राज्य खड़ा किया.
सोना लदी लावरिस कार से सौरभ शर्मा का कनेक्शन-भोपाल में मेंडोरी गांव से जिस एसयूवी गाड़ी से 54 किलो सोना और 10 करोड़ बरामद हुआ है वहां सौरभ शर्मा के करीबी चेतन सिंह गौर के नाम पर रजिस्टर्ड है. सौरभ शर्मा मूल रूप से मध्य प्रदेश के ग्वालियर का रहने वाला है। जबकि उसका दोस्त चेतन गौर भी ग्वालियर का ही रहने वाला है. ग्वालियर के आरटीओ नंबर से रजिस्टर्ड जिस इनोवा क्रिस्टा से 54 किलो सोना और 10 करोड़ नगद मिला है, उसका इस्तेमाल सौरभ सिंह ही करता है. कहा जा रहा है कि चेतन सिंह, सौरभ शर्मा का बहुत नजदीकी है. सौरभ शर्मा के साथ बतौर ड्राइवर का काम प्रारम्भ करने वाले चेतन सिंह आज सौरभ सिंह का सबसे बड़ा राजदार है और सौरभ के रियल एस्सटेट से जुड़े काम वहीं संभाल रहा है. परिवहन विभाग से लेकर कारोबार में चेतन सिंह ने जिम्मेदारी संभाल रखी थी. मूल रूप से ग्वालियर का रहने वाले चेतन सिंह करीब छह वर्ष पहले ग्वालियर से भोपाल शिफ्ट हो गया था.
सौरभ ने महज 12 वर्ष की जॉब में प्रदेशभर में करोड़ों की गैरकानूनी कमाई से जमीनों और कारोबार का साम्राज्य खड़ा कर लिया. परिवहन महकमें से जॉब छोड़ने से पहले ही वह रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ गया था। मूल रूप से ग्वालियर निवासी सौरभ को अपने चिकित्सक पिता की स्थान अनुकंपा नियुक्ति मिली थी. महज कुछ वर्ष की जॉब में ही उसका रहन-सहन बदल गया था. इसकी कम्पलेन परिवहन विभाग सहित अन्य जांच एजेंसियों पर की जाने लगीं तो सौरभ ने वीआरएस लेने ले लिया। इसके बाद भोपाल के कई नामचीन बिल्डरों के साथ प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट करने लगा.

