इस फैसले के बाद सरकार के प्रशासनिक ढांचे में किया बड़ा बदलाव
पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास को पीएम मोदी का नया प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। इस निर्णय के बाद गवर्नमेंट के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। शक्तिकांत दास की नियुक्ति को केंद्र गवर्नमेंट के जरूरी निर्णयों में से एक बताया जा रहा है। उनकी गहरी प्रशासनिक समझ और आर्थिक विशेषज्ञता को देखते हुए यह नियुक्ति की गई है।

शक्तिकांत दास का करियर और अनुभव
शक्तिकांत दास आरबीआई के 25वें गवर्नर रह चुके हैं और उन्होंने राष्ट्र की मौद्रिक नीति को आकार देने में अहम किरदार निभाई है। इसके अलावा, वे वित्त मंत्रालय में भी विभिन्न जरूरी पदों पर कार्यरत रहे हैं।
महत्वपूर्ण पद और जिम्मेदारियां:
- आरबीआई गवर्नर (2018 – 2024): अपने कार्यकाल में उन्होंने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने और आर्थिक सुधारों को लागू करने में जरूरी सहयोग दिया।
- वित्त मंत्रालय में सचिव: केंद्रीय वित्त मंत्रालय में विभिन्न भूमिकाओं में रहकर उन्होंने GST और नोटबंदी जैसी नीतियों को लागू कराने में योगदान दिया।
- नीति आयोग और अन्य प्रशासनिक भूमिकाएं: गवर्नमेंट की नीतियों को कारगर रूप से लागू करने में उनका अनुभव जरूरी रहा है।
- राजकोषीय नीति निर्माण: उन्होंने विभिन्न राजकोषीय सुधारों में भी भागीदारी निभाई, जिससे अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिली।
प्रधान सचिव के रूप में उनकी भूमिका
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के रूप में शक्तिकांत दास अब गवर्नमेंट की नीतियों के क्रियान्वयन और प्रशासनिक फैसलों में अहम किरदार निभाएंगे। उनकी आर्थिक विशेषज्ञता और प्रशासनिक अनुभव से पीएम मोदी की कार्यशैली को और अधिक कारगर बनाने की आशा है।
उनकी नियुक्ति से वित्तीय नीति निर्माण और प्रशासनिक सुधारों में तेजी आएगी। साथ ही, वे गवर्नमेंट की दीर्घकालिक विकास योजनाओं को अमल में लाने में सहायक होंगे।
नियुक्ति का असर और भविष्य की चुनौतियां
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटे जैसी समस्याओं को देखते हुए, गवर्नमेंट को एक अनुभवी प्रशासक की आवश्यकता थी। ऐसे में उनके अनुभव और प्रशासनिक दक्षता से गवर्नमेंट को नीति निर्माण में सहायता मिलेगी।
इसके अतिरिक्त, डिजिटल भारत, बैंकिंग सुधार, और नए वित्तीय नियमों को लागू करने में भी उनकी जरूरी किरदार होगी। उनके नेतृत्व में गवर्नमेंट की नीतियों को और अधिक कारगर बनाया जा सकेगा।

