ATS ने अफगानी नागरिक इकबाल खान को कोलकाता से किया गिरफ्तार
फर्जी दस्तावेजों के जरिये भारतीय पासपोर्ट बनवाने के मुद्दे में एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड (ATS) ने अफगानी नागरिक इकबाल खान (27) पिता इस्लाम खान को कोलकाता से सोमवार को अरैस्ट किया है. वह फर्जी पासपोर्ट के जरिये अफगानिस्तान जाने की फिराक में था. उसे मंग
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एटीएस ने अकबर खान से कठोरता से पूछताछ की. उसने अहम जानकारी देते हुए इकबाल खान का नाम कहा और बोला कि वह कोलकाता में छिपा है. बता दें कि एटीएस ने शुक्रवार रात जबलपुर शहर के छोटी ओमती क्षेत्र से अफगानी नागरिक सोहबत खान को अरैस्ट किया था, जो 10 वर्ष से छिपकर रह रहा था. आम नागरिक की तरह कंबल, चादर बेचने वाला सोहबत खान फर्जी पासपोर्ट बनवाकर लोगों को अफगानिस्तान भिजवाता था. एटीएस इस रैकेट में आतंकवादी कनेक्शन भी खंगाल रही है.
जब यह जानकारी एटीएस को लगी तो उस पर शिकंजा कसना प्रारम्भ कर दिया. धीरे-धीरे तार जुड़ते गए. अभी तक एटीएस ने सोहबत खान, अकबर खान, इकबाल खान, दिनेश गर्ग, चंदन सिंह, महेश सुखदान को अरैस्ट किया है. इनमें से सोहबत खान, अकबर खान, दिनेश गर्ग, चंदन सिंह, महेश सुखदान केंद्रीय कारावास जबलपुर में हैं. मुद्दे में एटीएस ने क्षेत्रीय पार्षद की भी किरदार को संदिग्ध माना है. एटीएस ने उससे पूछा है कि फर्जी डॉक्यूमेंट्स आखिर तैयार कैसे हुए.
AK-47 के साथ सोशल मीडिया पर डाला था फोटो
करीब पांच माह पहले एटीएस ने सोशल मीडिया से एक फोटो रिकवर की. फोटो में पुरुष एके-47 के साथ था. जानकारी जुटाई गई तो पता चला पुरुष का नाम सोहबत खान है, जो कि अफगानिस्तान का है, पर कुछ वर्षों से मध्यप्रदेश के जबलपुर में गैरकानूनी रूप से छिपकर रह रहा है. एटीएस ने सोहबत खान के संबंध में और जानकारियां जुटाई तो पता चला कि उसने जबलपुर की एक स्त्री से विवाह कर ली है. इसके बाद पासपोर्ट के लिए उसने अपना आधारकार्ड भी बनवा लिया.
एटीएस ने सोहबत खान को अरैस्ट कर पूछताछ की तो जबलपुर में वन विभाग में पदस्थ दिनेश गर्ग, शंकरशाह नगर में रहने वाले चंदन सिंह और कटंगा निवासी महेश सुखदान के नाम सामने आए. फर्जी पासपोर्ट बनवाने में सभी के भिन्न-भिन्न जिम्मेदारी थी. इसके लिए सोहबत खान उन्हें अच्छी खासी धनराशि भी देता था.
आठनल के पास रहता था किराए से
सोहबत खान छोटी ओमती के आठनल के पास किराए के मकान में रहता था. वह 2015 में हिंदुस्तान आया था. यहां उसने विवाह करने के बाद फर्जी आधार कार्ड, पेनकार्ड, मूल निवासी, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य डॉक्यूमेंट्स बनवा लिए थे. उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 2020 में सोहबत खान ने फर्जी पासपोर्ट बनवा लिया था.
डॉक्टर की किरदार भी संदिग्ध
सूत्र बताते हैं कि गिरफ्तारी के बाद सोहबत खान की गैंग के सदस्य चंदन गर्ग ने स्वयं को एचआईवी पॉजिटिव कहा था. जिला हॉस्पिटल में उसकी जांच कराई गई तो रिपोर्ट पॉजिटिव ही आई. एटीएस ने सोमवार को फिर से जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आ गई. इससे जिला हॉस्पिटल के चिकित्सक की किरदार पर संदेश किया जा रहा है.
किस आदमी का क्या था काम
- सोहबत खान- अफगानिस्तान का सोहबत खान 2015 से जबलपुर में रह रहा था. वह जबलपुर में कंबल, चादर बेचता था. अपने आप को हिंदुस्तान का निवासी बताने के लिए उसने शहर की एक स्त्री से विवाह किया और फर्जी ढंग से डॉक्यूमेंट्स तैयार करवाए. वह पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में रहने वाले 20 से अधिक साथियों के जबलपुर से ही फर्जी पासपोर्ट बनवाने के कोशिश में था. अकबर और इकबाल ने पासपोर्ट तैयार करवा लिए थे और कुछ अन्य लोगों भी इसके नेटवर्क में थे.
- चंदन सिंह– जबलपुर निवासी चंदन सिंह भी इस रैकेट का अहम सदस्य है. रामपुर शंकरशाह नगर में रहने वाला चंदन सिंह को सोहबत खान के साथी के रूप में अरैस्ट करने के बाद न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे कारावास भेज दिया. एटीएस की गिरफ्त में आया चंदन सिंह स्वयं को वकील बताता था. वह कलेक्ट्रेट और जिला न्यायालय में घूमकर लोगों के छोटे-मोटे काम कराता था. इस दौरान उसकी मुलाकात सोहबत खान से हुई तो उसने फर्जी डॉक्यूमेंट्स बनवाने में उसकी सहायता प्रारम्भ कर दी. सोहबत के ही कहने पर उसने अफगानिस्तान के कुछ लोगों के फर्जी शपथ पत्र बनवाए और फिर उन्होंने नोटराइज कराया.
- महेश सुखदान- कटंगा निवासी महेश सुखदान भी इस रैकेट का अहम सदस्य है. इसने फर्जी डॉक्यूमेंट्स तैयार कराने में चंदन सिंह की सहायता की थी. महेश सुखदान की मिलीभगत सामने आई तो पता चला कि वह इस पूरी प्रक्रिया में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल है. फर्जी कागजात पर महेश सुखदान के हस्ताक्षर मिले हैं.
- दिनेश गर्ग- वन विभाग में पदस्थ दिनेश गर्ग प्रतिनियुक्ति पर चुनाव सेल में कार्यरत है. उसने सोहबत खान के संपर्क में आने के बाद फर्जी डॉक्यूमेंट्स तैयार कराने प्रारम्भ कर दिए थे. पूछताछ में सोहबत खान ने कहा कि दिनेश का काम डॉक्यूमेंट्स में हेरफेर करना होता था, जिसके लिए उसे अच्छी खासी धनराशि देता था. एटीएस दिनेश के साथियों की तलाश में जुटी है. वह यह भी पता लगा रही है कि दिनेश किसके संपर्क में और कब से जुड़ा है.
- अकबर खान- एटीएस ने अकबर खान को कोलकाता से अरैस्ट किया है. यह 20 साल पहले अफगानिस्तान से हिंदुस्तान आया था. उसे न्यायालय में पेश करने के बाद कारावास भेज गया है. अकबर दूसरा अफगानी नागरिक है, जिसने कि फर्जी पासपोर्ट में सोहबत खान की सहायता ली.
- इकबाल खान- कोलकाता में कई वर्ष से रह रहे इकबाल खान को भी एटीएस ने अरैस्ट किया है. वह इस फर्जीवाड़े में शामिल हुआ और डॉक्यूमेंट्स तैयार कराए.

