भजनलाल सरकार ने डीलरों के कमिशन में की बढ़ोतरी
Rajasthan News: लम्बे समय से राजस्थान में राशन डीलर्स कमिशन बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए भजनलाल गवर्नमेंट ने डीलरों के कमिशन में बढ़ोतरी की है। इसके आदेश जारी करते हुए कमिशन 137 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 150.70 रुपए कर दिया है। ये बढ़ी हुई दरें 1 अप्रैल से लागू होगी। आदेश के मुताबिक, राशन डीलरों को मिलने वाले कमिशन में से राज्य गवर्नमेंट के मद का कमिशन बढ़ाया गया है। राज्य गवर्नमेंट वर्तमान में हर राशन डीलर को 100 किलोग्राम गेंहू का आवंटन करने पर 26 रुपए कमिशन देती है, जिसे अब 13.70 रुपए बढ़ाकर 39.70 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। 
इसके अतिरिक्त केंद्र से मिलने वाला 90 रुपए और पॉश मशीनों से आवंटन करने पर मिलने वाला अतिरिक्त 21 रुपए कमीशन पहले की तरह मिलता रहेगा। इस कमीशन में से वर्तमान की तरह 9.21 रुपए की कटौती होती रहेगी। वर्तमान में पोस मशीनों के रखरखाव के पेटे गवर्नमेंट 5.21 रुपए प्रति क्विंटल और इलेक्ट्रॉनिक कांटे के पेटे 4 रुपए प्रति क्विंटल की कटौती की जा रही है। ये कटौती आगे भी जारी रहेगी। इस हिसाब से राशन डीलर्स के हाथ में 141.49 रुपये ही कमीशन मिल सकेगा।
उधर राशन डीलर्स का बोलना है कि एक क्विंटल गेहूं पर 150 रुपये रुपए कमीशन मिलेगा। इनमें से दस से बारह हजार रुपए दुकान का किराया, तोल में फर्क और छीजत,पोस मशीन का चार्ज, मजदूर का भुगतान भी शामिल है। ऐसे में राशन डीलरों को घर चलाना इन दिनों कठिन हो रहा है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के अनुसार गरीब तबके के लोगों को केन्द्र गवर्नमेंट हर महीने फ्री गेहूं राशन दुकानों से आवंटन करती है। NFSA सूची से जुड़े हर आदमी को हर महीने 5 किलोग्राम गेंहू दिया जाता है। राजस्थान में वर्तमान में 25 हजार राशन की दुकानें हैं, जिनके जरिए गवर्नमेंट NFSA से जुड़े परिवारों को हर महीने गेहूं का फ्री वितरण करवाती है। इन दुकानों पर आने वाले लाभ पाने वाले पॉश मशीन पर अंगूठा लगाते हैं, जिसके बाद ही उनको गेहूं का वितरण किया जाता है। राजस्थान में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना से 4.36 करोड़ लोग जुड़े हैं। गवर्नमेंट ने पिछले दिनों एनएफएसए का पोर्टल खोलकर लोगों से आवेदन लिए थे। गवर्नमेंट इस वर्ष 30 लाख से अधिक लोगों के नाम इस सूची में जोड़ने की तैयारी कर रही है।
बहरहाल, राज्य गवर्नमेंट ने राशन डीलर को मानदेय देने से तो हाथ खींच लिए है और गेहूं कमीशन के भरोसे अब राशन डीलरों की पार नहीं पड़ रही। लंबे समय से इनको अतिरिक्त व्यवस्थाए संसाधन के जरिए कमाई बढ़ाने की बात चलती रही है, लेकिन यह केवल बातों तक ही सीमित रह गई। जो हल्की कमीशन मिलता है, वह भी समय पर नहीं मिलता। इसलिए कमीशन जो बढ़ाया गया वो समय पर मिले तो थोड़ी राहत मिल सकती है।

