अभी चैन की सांस नहीं ले पाएंगे भूपेश बघेल और चैतन्य, हाई कोर्ट ने दिया यह बयान
सुप्रीम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मुद्दे में जाँच और गिरफ्तारी के विरुद्ध मांगी गई पर्सनल राहत के संबंध में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का रुख करने का आदेश दिया है. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हाई कोर्ट से मुद्दे का शीघ्र निपटारा करने का निवेदन किया. प्रवर्तन निदेशालय की जाँच, गिरफ्तारी आदि की शक्तियों से संबंधित पीएमएलए प्रावधानों की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाले दोनों के संबंध में, शीर्ष न्यायालय की पीठ ने याचिकाकर्ताओं से सर्वोच्च कोर्ट में एक नयी याचिका दाखिल करने को कहा, जिस पर 6 अगस्त को विचार किया जाएगा.

ईडी के अनुसार, इस घोटाले से राज्य के खजाने को 2,161 करोड़ रुपये से ज़्यादा का हानि हुआ. कथित गैरकानूनी सिंडिकेट छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के ज़रिए संचालित होता था, शराब बनाने वालों से घूस लेता था और बदले में उन्हें बाज़ार में हिस्सेदारी देता था. सरकारी दुकानों के ज़रिए देशी शराब की ऑफ-द-बुक बिक्री, विदेशी शराब व्यापार के लिए एफएल-10ए लाइसेंस में हेराफेरी, और कार्टेल जैसी बाज़ार प्रथाओं का कथित तौर पर क्राइम की भारी कमाई को सफेद करने के लिए इस्तेमाल किया गया.
ईडी ने इस घोटाले में अनवर ढेबर और पूर्व नौकरशाह अनिल टुटेजा सहित कई प्रमुख लोगों को नामजद किया है. साथ ही, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा पर भी इल्जाम लगाए गए हैं, जिन्हें कथित तौर पर नियमित रूप से घूस मिलती थी. अब तक, इस मुद्दे में 205 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त की जा चुकी है. कांग्रेस पार्टी पार्टी ने इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है और इसे “राजनीतिक प्रतिशोध की खुली कार्रवाई” करार दिया है. पार्टी नेताओं का दावा है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र गवर्नमेंट विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और छत्तीसगढ़ में आनें वाले चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है

