राष्ट्रीय

केंद्र सरकार ने स्वर्ण मौद्रीकरण योजना (जीएमएस) को बंद करने का लिया निर्णय

केंद्र गवर्नमेंट ने बेहतर होती बाजार स्थितियों को देखते हुए स्वर्ण मौद्रीकरण योजना (जीएमएस) को बुधवार से बंद करने का फैसला लिया है. हालांकि, बैंक अपनी अल्पकालिक स्वर्ण जमा योजनाओं (एक से तीन साल) को जारी रख सकते हैं. बता दें कि जीएमएस में अल्पकालिक बैंक जमा (एक-तीन वर्ष), मध्यम अवधि सरकारी जमा (पांच-सात वर्ष) और दीर्घकालिक सरकारी जमा (12-15 वर्ष) के रूप में तीन घटक शामिल हैं.

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केंद्र गवर्नमेंट की घोषणा

मामले में गवर्नमेंट ने घोषणा की है कि 26 मार्च, 2025 से जीएमएस के मध्यम अवधि और दीर्घकालिक सरकारी जमा वाले घटकों को बंद कर दिया जाएगा. यह फैसला स्वर्ण मौद्रीकरण योजना की वर्तमान स्थिति और बाजार की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. आरबीआई के दिशा-निर्देशों के मुताबिक इस फैसला को लागू किया जाएगा.

क्या होता रहेगा स्वर्ण जमा विकल्प?

हालांकि, गवर्नमेंट ने जीएमएस के कुछ हिस्सों को बंद करने का निर्णय लिया है, लेकिन बैंक अब भी अपनी अल्पकालिक स्वर्ण जमा योजनाओं (1-3 साल) को जारी रख सकते हैं. इस परिवर्तन के बाद, लोग अभी भी छोटी अवधि के लिए सोने को जमा कर सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक और मध्यकालिक योजनाओं का अब कोई भविष्य नहीं होगा.

क्या है स्वर्ण मौद्रीकरण योजना, समझिए

स्वर्ण मौद्रीकरण योजना की घोषणा 15 सितंबर 2015 को की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय परिवारों और संस्थानों के पास रखे गए सोने को वित्तीय संस्थाओं में लाकर उसका इस्तेमाल उत्पादक उद्देश्यों के लिए करना था. दावा किया जाता है कि हिंदुस्तान में सोने का एक बहुत बड़ा भंडार पड़ा हुआ है, जिसे लोग पारंपरिक रूप से अपने घरों में रखते हैं. इस योजना का उद्देश्य इस सोने का ठीक इस्तेमाल करना था, ताकि इससे सोने के आयात पर निर्भरता कम की जा सके और इससे राष्ट्र की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सके.

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