राष्ट्रीय
Chai Par Sameeksha: भारत को बांग्लादेश से लेनी चाहिए सीख
प्रभासाक्षी समाचार नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस हफ्ते बांग्लादेश हिंसा, संसद मानसून सत्र और मनीष सिसोदिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी. इस दौरान प्रभासाक्षी संपादक ने बोला कि बांग्लादेश जैसी स्थिति कभी हिंदुस्तान में नहीं आये इसके लिए वोट बैंक की राजनीति से प्रभावित हुए बिना कार्य करने होंगे. प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने बोला कि हर विषय पर राष्ट्र में राजनीति होने लगती है. लेकिन कोई भी राष्ट्र हो, किसी भी राष्ट्र में यदि अल्पसंख्यक हैं तो उसके सुरक्षा की जिम्मेदारी वहां की गवर्नमेंट की है. बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है वह ठीक नहीं है और जाहिर सी बात है कि हिंदुस्तान इस पर पूरी नजर बनाए हुए रखा हुआ है.

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नीरज दुबे ने बोला कि इसका बड़ा कारण यह है कि यह तमाम चीजें हिंदुस्तान के पड़ोसी राष्ट्र में हो रहा है और सीएए भी इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र गवर्नमेंट की ओर से लाया गया था. हाालंकि, उन्होंने बोला कि सीएए का बांग्लादेश में फिलहाल जो कुछ भी हो रहा है उससे कोई वास्ता नहीं था. नीरज दुबे ने बोला की हालत कितना खराब है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि लोग हिंदुस्तान के बॉर्डर पर खड़े हैं और हिंदुस्तान आने की प्रयास कर रहे हैं. इनमें अधिकांश हिंदू है. नीरज दुबे ने बोला कि अल्पसंख्यकों के विरुद्ध बांग्लादेश में जबरदस्त ढंग से अत्याचार जारी है. उनके जो वीडियो बनाए गए हैं. वह जाहिर है कि कोई ना कोई संकेत देने की प्रयास की गई है. यह पूरी ढंग से एकजुट होने का समय है.
उन्होंने बोला कि जो प्रदर्शन आरक्षण के विरुद्ध हो रहा था, वह शेख हसीना के हटते ही अल्पसंख्यकों के विरुद्ध कैसे होने लगा? उन्होंने बोला कि इसके पीछे गहरी षड्यंत्र है, कोई पुराना हिसाब चुकता करने की प्रयास कर रहा है और बांग्लादेश की मूल्य इसकी चुकानी पड़ेगी. बांग्लादेश का जो विकास रफ्तार था, वह पूरी ढंग से ठप हो गया है. कई कंपनियां महान निवेश करने से कतरा रही है. कपड़ा उद्योग वहां बहुत बड़ा था. लेकिन अब उसे पर भी ब्रेक लग सकता है. बांग्लादेश ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है. धर्म के नाम पर वहां युवाओं को बड़गलाने की प्रयास की गई है.
प्रभासाक्षी संपादक ने बोला कि सपा की सांसद जया बच्चन ने राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ को नाहक ही टकराव में घसीटा कर गलत परम्परा कायम की है. साथ ही, इस बार संसद के मॉनसून सत्र के दौरान ऐसा कई बार देखने को मिला कि लोकसभा में स्पीकर ओम बिड़ला और राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ से विपक्षी सदस्यों ने जानबूझकर उलझने का कोशिश किया. दोनों सदनों के सभापतियों पर विपक्ष ने तमाम तरह के आक्षेप लगाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाये. संभवतः ऐसा इसलिए किया गया ताकि आसन की निष्पक्षता को शक के कठघरे में खड़ा किया जा सके.
प्रभासाक्षी संपादक ने बोला कि दिल्ली आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं के मुद्दे में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को 17 महीने बाद जमानत मिलना आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी राहत है. सीएम अरविंद केजरीवाल भी इस मुद्दे में कारावास में बंद हैं, ऐसे में पार्टी के दूसरे नंबर के बड़े नेता का बाहर आना निश्चित रूप से आम आदमी पार्टी (AAP) के काडर में नये उत्साह का संचार कर गया है. लेकिन यहां एक बात पर सभी को गौर करना होगा कि जमानत मिलने का अर्थ बरी हो जाना नहीं है. साथ ही शराब घोटाले में जिस प्रकार के गंभीर इल्जाम आम आदमी पार्टी के नेताओं पर लगे हैं उनसे उनके कट्टर निष्ठावान होने के दावों पर तो प्रश्नचिन्ह खड़ा हो ही गया है.