छत्तीसगढ़: 11 परिवारों ने सनातन धर्म में रखा फिर से कदम
रायपुर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में कई परिवारों ने सनातन धर्म में वापसी की. यह घटना हिन्दू एकता शतचण्डी महायज्ञ के दौरान हुई, जिसे बाबा बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रवचन से प्रेरित होकर आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद 11 परिवार सनातन धर्म की महिमा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने पुनः हिन्दू धर्म अपनाने का फैसला लिया. ये लोग वर्षों पहले लालच या बहकावे में आकर ईसाई बन गए थे.

घर वापसी अभियान को बीजेपी नेता प्रबल प्रताप जूदेव ने नेतृत्व दिया. उन्होंने उन सभी परिवारों का पांव धोकर सनातन धर्म में उनका स्वागत किया. कार्यक्रम में कांकेर के सांसद भोजराज नाग, पूर्व सांसद मोहन मडावी और वर्तमान विधायक आशाराम नेताम भी मौजूद थे. इन नेताओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से परिवारों को सम्मानित करते हुए उनका सनातन धर्म में पुनः स्वागत किया. बाबा बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ में कन्वर्जन से उत्पन्न जनसंख्या असंतुलन पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि राज्य के लगभग 20 जिलों में डेमोग्राफी में बड़ा परिवर्तन आया है. उनके अनुसार, इन जिलों में हिन्दू पहले बहुसंख्यक थे, लेकिन अब वे अल्पसंख्यक हो गए हैं, और हिन्दू समुदाय के लोग अत्याचार का सामना कर रहे हैं. बाबा बागेश्वर ने बल देकर बोला कि पूरे सनातन समाज को मिलकर चंगाई सभा और लव जिहाद जैसी चुनौतियों का सामना करना होगा.
बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुस्तान को हिन्दू देश बनाने की अपनी मांग को दोहराया. उन्होंने बोला कि समय आ गया है कि सभी हिन्दू एकजुट होकर समाज को सुरक्षित और मजबूत बनाएं. वहीं, प्रबल प्रताप जूदेव ने इस अवसर पर बोला कि इतिहास साक्षी है कि जब भी बड़े पैमाने पर हिन्दू कन्वर्जन हुआ है, उस क्षेत्र ने हिंदुस्तान से अलग होने की प्रयास की है. उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपने पिता की तरह जीवन भर घर वापसी अभियान को आगे बढ़ाते रहेंगे.
इस प्रकार, यह आयोजन हिन्दू धर्म के मूल्यों और परंपराओं को बनाए रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की एक मिसाल बन गया. मौजूद सभी परिवारों ने सनातन धर्म में लौटकर अपने विश्वास को पुनः स्थापित किया, और कार्यक्रम में शामिल प्रमुख व्यक्तित्वों ने उनका स्वागत करते हुए इस कदम को एक नयी आरंभ के रूप में देखा.

