राष्ट्रीय

फिर से पलटने वाले हैं सियासी पेंच, शशि थरूर से कांग्रेस ने किया संपर्क

Shashi Tharoor and Manish Tiwari: संसद के दोनों सदनों में आज मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर चर्चा हो रही है. लोकसभा में सोमवार को चर्चा की आरंभ हुई. इस दौरान कांग्रेस पार्टी पार्टी के नेताओं ने जमकर गवर्नमेंट पर हमले किए. लेकिन, पार्टी की ओर से दो सीनियर सांसदों शशि थरूर और मनीष तिवारी के भाषण को लेकर संशय बना हुआ है. ये दोनों सांसद मोदी गवर्नमेंट की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश भेजे गए सांसदों के डेलिगेशन के हिस्सा थे. विदेश की धरती पर इन दोनों ने ऑपरेशन सिंदूर और राष्ट्र की सेनाओं की जमकर प्रशंसा की थी. इन दोनों ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाक को बेनकाब करने का काम किया था.

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मनीष तिवारी का छलका दर्द

इस बीच चर्चा में हिस्सा नहीं लेने का मौका नहीं मिलने के कारण चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने दर्द छलक आया है. उन्होंने कांग्रेस पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा है. मनीष ने स्वयं को और सांसद शशि थरूर को पार्टी द्वारा बोलने का मौका न दिए जाने पर गाने के जरिए जताई अपनी नाराजगी है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा- है प्रीत जहां की रीत सदा मैं गीत वहां के गाता हूं, हिंदुस्तान का रहने वाला हूं हिंदुस्तान की बात सुनाता हूं.

एक तरह से मनीष कह रहे है कि वो हिंदुस्तान की बात करते रहेंगे मतलब राष्ट्र को जहां आवश्यकता होगी पार्टी लाइन से ऊपर उठकर काम करेंगे और राष्ट्र के दवाओं पर पार्टी लाइन के खांचे में नहीं बंधेंगे चाहे उसका अंजाम कुछ भी हो. मनीष तिवारी और शशि थरूर दोनों ही हिंदुस्तान द्वारा विदेश भेजे गए डेलिगेशन का हिस्सा थे लेकिन गौर करने वाली बात है कि उनका नाम कांग्रेस पार्टी द्वारा भेजी गई सूची में नहीं था. कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में जिन सांसदों को बोलने का मौका दिया है उनमें प्रियंका गांधी, प्रणीति शिंदे, गौरव गोगोई, दीपेंद्र हुड्डा, सप्तगिरि उलाका और बिजेंद्र ओला का नाम है.

थरूर से पार्टी ने किया संपर्क

कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि थरूर ने बोलने के लिए प्रक्रिया के अनुसार पार्टी से संपर्क ही नहीं किया उसके बाद जब इस मामले में उनसे पूछा गया तो उन्होंने पोर्ट बिल पर बोलने की ख़्वाहिश जाहिर की. वहीं मनीष तिवारी के अनुसार उन्होंने पार्टी से बोलने का मौका दिए जाने के लिए संपर्क किया था, लेकिन पार्टी ने उनका नाम शामिल नहीं किया. सूत्रों के अनुसार शशि थरूर ने बोला कि इस हालात में कहना असंभव है. जो मैंने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कहा है सिर्फ़ बात बोली जा सकती है, लेकिन ऐसी बातें करना पार्टी लाइन का उल्लंघन होगा. पार्टी गवर्नमेंट पर हमलावर है. इसको लेकर तीन लाइन व्हीप जारी किया गया है. ऐसे में इस हालात में चुप रहना ही एक मात्र विकल्प है.

कांग्रेस में एक समय के बाद दो सांसद नेताओं के तेवर आने वाले दिनों में पार्टी की मुसीबत बढ़ा सकते हैं. पंजाब और केरल दोनों स्थान आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने वाले है और यदि दोनों राज्यों के ये नेता यू ही पार्टी की मुखालफत करते रहे तो कांग्रेस पार्टी की चुनावी संभावनाओं को हानि हो सकता है. राहुल गांधी ने शशि थरूर के विरुद्ध फिलहाल किसी भी तरह की कार्यवाही से इनकार किया है हालांकि पार्टी की लोकल यूनिट ने उनको अपने कार्यक्रमों में बुलाना बंद कर दिया है.

वहीं मनीष तिवारी के संबंध भी पार्टी हाईकमान से लगभग एक दशक से ठीक नहीं चल रहे. मनीष ने 2014 का लोकसभा चुनाव न लड़ने का जब निर्णय किया था तभी से नेतृत्व से उनके संबंध कभी सामान्य नहीं हुए. उसके बाद जबकि आप के संपर्क में होने की खबरें भी पार्टी हाईकमान और उनके बीच मनमुटाव की वजह बनीं.

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