कांग्रेस को हजम नहीं हुई पीटर नवारो की ‘ब्राह्मण’ टिप्पणी, खेड़ा ने किया बड़ा पलटवार
कांग्रेस पार्टी नेता पवन खेड़ा ने सोमवार को व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो की हिंदुस्तान पर अमेरिकी टैरिफ को ठीक ठहराने के लिए की गई “ब्राह्मण” टिप्पणी की आलोचना की और इसे ‘निराधार’ बताया. एएनआई से बात करते हुए, पवन खेड़ा ने बोला कि अमेरिका को इस तरह के निराधार बयान नहीं देने चाहिए. इस बीच, तृणमूल कांग्रेस पार्टी की सांसद सागरिका घोष ने बोला कि “ब्राह्मण” शब्द का इस्तेमाल वर्तमान में ब्रिटेन में सामाजिक या आर्थिक “कुलीन वर्ग” के लिए किया जाता है. उन्होंने आगे कहा कि “बोस्टन ब्राह्मण” शब्द का इस्तेमाल कभी अमेरिका में न्यू इंग्लैंड के अमीर अभिजात वर्ग के लिए किया जाता था.
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‘X’ पोस्ट में बोला गया है कि ‘बोस्टन ब्राह्मण’ शब्द कभी अमेरिका में न्यू इंग्लैंड के अमीर अभिजात वर्ग के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द था. अंग्रेजी भाषी दुनिया में आज भी “ब्राह्मण” शब्द का इस्तेमाल सामाजिक या आर्थिक “अभिजात वर्ग” (इस मुद्दे में अमीर) को दर्शाने के लिए किया जाता है. X पर निरक्षरता आश्चर्यजनक है.“भारतीय अर्थशास्त्री और पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बोला कि पीटर नवारो की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि अमेरिका के अंदर हिंदुस्तान के बारे में किसका बोलबाला है.
सान्याल ने ‘एक्स’ पर लिखा कि नवारो का यह नवीनतम ताना- कि “ब्राह्मण रूसी ऑयल से मुनाफ़ा कमा रहे हैं” – हमें इस बारे में बहुत कुछ बताता है कि अमेरिका के नीतिगत/बौद्धिक क्षेत्रों में हिंदुस्तान और हिंदुओं के बारे में किसका बोलबाला है. यह सीधे तौर पर 19वीं सदी के औपनिवेशिक तानों से लिया गया है, जो जेम्स मिल जैसे लोगों तक जाते हैं. एडवर्ड सईद का प्राच्यवाद वाला तर्क शायद हिंदुस्तान के लिए मध्य पूर्व पर उनके मूल सिद्धांत से ज़्यादा ठीक है.
इससे पहले, पीटर नवारो ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हिंदुस्तान से आयात पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के निर्णय को ठीक ठहराते हुए कड़ा रुख अपनाया. अब उन्होंने इस मामले पर जाति-आधारित टिप्पणी की और राष्ट्र के ब्राह्मणों पर “भारतीय लोगों की मूल्य पर मुनाफाखोरी” करने का इल्जाम लगाया. हिंदुस्तान को क्रेमलिन के लिए एक धोबीघर बताते हुए, नवारो ने सोमवार को फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू के दौरान नयी दिल्ली पर व्यापार असंतुलन और भू-राजनीतिक गठबंधनों को बढ़ावा देने का इल्जाम लगाया, जो अमेरिकी हितों के उल्टा हैं.

