कांग्रेस ने हमेशा बाबासाहेब अंबेडकर का अपमान किया है : प्रह्लाद जोशी
नई दिल्ली, 25 मार्च . कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के संविधान बदल रहा है बयान पर राजनीति तेज हो गई है. बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने डीके शिवकुमार के बयान को लेकर कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा.
दिल्ली में संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए डीके शिवकुमार द्वारा संविधान को लेकर दिए बयान पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बोला कि कांग्रेस पार्टी पार्टी और डीके शिवकुमार को माफी मांगनी चाहिए. इनका छिपा हुआ एजेंडा इन्होंने सार्वजनिक कर दिया है.
उन्होंने बोला कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा बाबासाहेब अंबेडकर का अपमान किया है और बहुत बार संविधान में संशोधन किया. कांग्रेस पार्टी ने बार-बार संविधान का भी अपमान किया है. डीके शिवकुमार के बयान पर कांग्रेस पार्टी को राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए.
दरअसल, डीके शिवकुमार से हाल ही में एक न्यूज चैनल के मंच पर कर्नाटक गवर्नमेंट की मुसलमान आरक्षण नीति को न्यायालय में चुनौती दिए जाने को लेकर प्रश्न किया गया था. इस पर उन्होंने बोला था, देखते हैं, न्यायालय क्या कहता है, हमने कुछ प्रारम्भ किया है. मुझे पता है कि सब न्यायालय जाएंगे. हमें एक अच्छे दिन का प्रतीक्षा करना होगा. बहुत सारे परिवर्तन हैं, संविधान बदल रहा है, और ऐसे निर्णय हैं जो संविधान को बदल देते हैं.
उनके इस बयान के बाद सोमवार को बेंगलुरु की सड़कों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने डीके शिवकुमार का पुतला फूंका था. वहीं, राज्यसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले को उठाया था. बीजेपी के कई नेताओं ने भी उनके बयान की आलोचना करते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की. हालांकि, डीके शिवकुमार ने सफाई पेश करते हुए बोला है कि बीजेपी ने उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया है.
वहीं, कांग्रेस पार्टी सांसद इमरान मसूद ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के संविधान बदलने वाले बयान पर बीजेपी की विरोध पर मंगलवार को प्रतिक्रिया दी. उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से वार्ता के दौरान बोला कि बीजेपी बेवजह के इल्जाम लगाती है. डीके शिवकुमार ने ऐसा कुछ भी नहीं बोला है, यदि बोला भी है तो बहुत ही हल्के अंदाज में. उन्होंने बोला कि यदि आवश्यकता होगी तो हम इसे भी करेंगे. संविधान में संशोधन हुए हैं. लेकिन, इस राष्ट्र में किसी को भी डाक्टर भीमराव अंबेडकर के संविधान को बदलने के बारे में सोचने का अधिकार नहीं है. जो लोग इसके बारे में बात करते हैं, वे पहले ही 400 से 240 पर आ गए हैं और उन्हें 240 से 100 पर आने में अधिक समय नहीं लगेगा.

