Caste Census : जाति जनगणना के लिए इन रूखों की मांग कर रही है कांग्रेस
Caste Census : कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर जातिगत जनगणना के मामले पर सभी सियासी दलों से जल्द वार्ता करने का आग्रह किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे में तेलंगाना मॉडल अपनाया जाए। खरगे ने यह भी मांग की कि राज्यों द्वारा पारित आरक्षण को संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल किया जाए, 50 फीसदी आरक्षण की सीमा खत्म हो और निजी शिक्षण संस्थानों में भी आरक्षण लागू किया जाए।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने खरगे का पांच मई की तारीख वाला यह पत्र अपने ‘एक्स’ हैंडल पर साझा किया। इसके बाद इसे खरगे ने भी रमेश ने कहा, “कांग्रेस कार्यसमिति की दो मई को हुई बैठक के बाद कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार रात पीएम को पत्र लिखा। राष्ट्र पहलगाम में हुए बर्बर आतंकवादी हमले को लेकर आक्रोश और पीड़ा से गुजर रहा था, और इसी बीच पीएम मोदी ने जातिगत जनगणना पर अचानक और हताशाजनक ‘यू-टर्न’ लिया। खरगे जी ने अपने पत्र में तीन बहुत जरूरी और साफ सुझाव दिए हैं।”
मुझे उस पत्र का कोई उत्तर नहीं मिला : खरगे
पत्र में खरगे ने कहा, “मैंने 16 अप्रैल, 2023 को आपको पत्र लिखकर कांग्रेस पार्टी द्वारा जातिगत जनगणना कराने की मांग आपके समक्ष रखी थी। अफसोस की बात है कि मुझे उस पत्र का कोई उत्तर नहीं मिला। दुर्भाग्य से, उसके बाद आपके पार्टी के नेताओं और स्वयं आपने कांग्रेस पार्टी पार्टी और कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व पर इस सही मांग को उठाने के लिए लगातार हमले किए।” उन्होंने बोला कि आज पीएम स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि यह मांग गहन सामाजिक इन्साफ और सामाजिक सशक्तीकरण के भलाई में है। पत्र में बोला गया है, “आपने बिना किसी साफ विवरण के यह घोषणा की है कि अगली जनगणना (जो वास्तव में 2021 में होनी थी) में जाति को भी एक अलग श्रेणी के रूप में शामिल किया जाएगा।”
जाति जनगणना के संदर्भ में तीन सुझाव
कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम को जाति जनगणना के संदर्भ में तीन सुझाव दिए। खरगे ने कांग्रेस पार्टी शासित तेलंगाना में हुए जातिगत सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा, “जनगणना से सम्बंधित प्रश्नावली का डिजाइन अत्यंत जरूरी है। जाति संबंधी जानकारी सिर्फ़ गिनती के लिए नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकत्र की जानी चाहिए। गृह मंत्रालय को जनगणना में पूछे जानेवाले प्रश्नों के लिए तेलंगाना मॉडल का इस्तेमाल करना चाहिए। “
रिपोर्ट में कुछ भी छिपाया नहीं जाना चाहिए
उनके अनुसार, प्रक्रिया के अंत में होने वाली रिपोर्ट में कुछ भी छिपाया नहीं जाना चाहिए ताकि प्रत्येक जाति के पूर्ण सामाजिक-आर्थिक आंकडे सार्वजनिक रूप से मौजूद हों, जिससे एक जनगणना से दूसरी जनगणना तक उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रगति को मापा जा सके और उन्हें कानूनी अधिकार दिए जा सकें। कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष का बोलना है, “इसके अतिरिक्त जाति जनगणना के जो भी नतीजे आएं, यह साफ है कि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गो के लिए आरक्षण पर मनमाने ढंग से लगाई गई 50 फीसदी की अधिकतम सीमा को संविधान संशोधन के माध्यम से हटाना होगा।”
अनुच्छेद 15(5) को लेकर क्या बोला खरगे ने
पत्र में खरगे ने कहा, “अनुच्छेद 15(5) को भारतीय संविधान में 20 जनवरी 2006 से लागू किया गया था। इसके बाद इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई। लंबे विचार-विमर्श के बाद, उच्चतम न्यायालय ने 29 जनवरी 2014 को इसे बरकरार रखा। यह निर्णय 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले आया।” उनके मुताबिक, यह निजी शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है।
उन्होंने बोला कि संसद की एक स्थायी समिति ने गत 25 मार्च को उच्च शिक्षा विभाग के लिए आर्थिक सहायता की मांग पर अपनी 364वीं रिपोर्ट में भी अनुच्छेद 15 (5) को लागू करने के लिए नया कानून बनाने की सिफारिश की थी। खरगे ने कहा, “जाति जनगणना जैसी किसी भी प्रक्रिया को किसी भी रूप में विभाजनकारी नहीं माना जाना चाहिए। सामाजिक और आर्थिक इन्साफ तथा स्थिति और अवसर की समानता सुनिश्चित करने के लिए इसे उपरोक्त सुझाए गए समग्र ढंग से कराना अत्यंत जरूरी है।’’

