राज्यपाल पद के कथित दुरुपयोग के खिलाफ कांग्रेस ने निकाला मोर्चा
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने शनिवार को बोला कि गवर्नर पद के कथित दुरुपयोग के विरुद्ध कांग्रेस पार्टी ने ‘राज भवन चलो’ मार्च आयोजित किया. कांग्रेस पार्टी की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार ने बोला कि इस मार्च का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज भवन किसी सियासी दल का कार्यालय न बने.

उपमुख्यमंत्री ने कहा, ”मैं साफ करना चाहता हूं कि हमने राज भवन चलो सीएम सिद्धरमैया की ओर से आयोजित नहीं किया. यह मुद्दा न्यायालय के विचाराधीन है….” उन्होंने कहा, ”राज भवन चलो मार्च यह सुनिश्चित करने के लिए है कि गवर्नर का कार्यालय किसी पार्टी का कार्यालय न बने. हम इस कानूनी पद की शुचिता की रक्षा करने की मांग को लेकर राजभवन जा रहे हैं.”
शिवकुमार ने बोला कि कुछ व्यक्तियों पर केस चलाने की अनुमति मांगने के लिए कई याचिकाएं गवर्नर के समक्ष लंबित हैं. तख्तियां, बैनर, पोस्टर लिए और गवर्नर थावरचंद गहलोत की निंदा करते हुए नारे लगाते हुए शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी नेताओं ने मार्च निकाला. इसमें कई मंत्री, कांग्रेस पार्टी विधायक और सांसद शामिल हुए. बाद में उन्होंने गहलोत को एक ज्ञापन भी सौंपा.
इससे पहले, सिद्धरमैया, उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों, कांग्रेस पार्टी विधायकों और सांसदों ने यहां विधान सौध परिसर पर गांधी प्रतिमा के नजदीक धरना प्रदर्शन किया. कांग्रेस पार्टी गवर्नर थावरचंद गहलोत द्वारा मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूमि आवंटन में कथित घोटाले की जांच किए जाने और सीएम सिद्धरमैया पर केस चलाने की स्वीकृति दिए जाने के विरुद्ध प्रदर्शन कर रही है. सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती पर एमयूडीए द्वारा उनकी जमीन के ‘अवैध अधिग्रहण’ के एवज में महंगी रेट पर वैकल्पिक भूखंड प्राप्त करने का इल्जाम है.
मुख्यमंत्री ने इल्जाम लगाया है कि राज्य में कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट को अस्थिर करने के लिए गवर्नर पद का दुरुपयोग किया गया है. सिद्धरमैया ने गहलोत पर भेदभाव करने का भी इल्जाम लगाया है. गवर्नर थावरचंद गहलोत ने 16 अगस्त को तीन सामाजिक संस्थाओं की याचिकाओं में उल्लिखित कथित अपराधों के लिए करप्शन निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 के अनुसार सीएम के विरुद्ध केस चलाने की स्वीकृति दी थी.

