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कांग्रेस ने मनरेगा योजना में NMMS का बताया अव्यवहारिक, दागे कई बड़े सवाल

Demand to withdraw NMMS in MNREGA: कांग्रेस ने गुरुवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) में ‘नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम’ (NMMS)  ऐप को लेकर प्रश्न खड़े किए और बोला कि इसे तुरन्त वापस लिया जाए, क्योंकि यह इस योजना के लिए अव्यावहारिक और प्रतिकूल है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने यह भी बोला कि मनरेगा के अनुसार न्यूनतम मजदूरी को रोजाना 400 रुपए किया जाए.

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रमेश ने एक बयान में बोला कि मई 2022 में मोदी गवर्नमेंट ने मनरेगा में उपस्थिति और कार्यों के डिजिटल सत्यापन के लिए ‘नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम’ (एनएमएमएस) ऐप की आरंभ की. इसके लागू होने के बाद से ही कांग्रेस पार्टी इस ऐप की व्यावहारिक समस्याओं और इसके द्वारा मनरेगा की आत्मा और मूल उद्देश्य को हानि पहुंचाए जाने की बात लगातार उठा रही थी.

उन्होंने बोला कि बीते 8 जुलाई को जारी एक अधिसूचना में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने आखिरकार एनएमएमएस से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को स्वीकार किया है. रमेश के मुताबिक आरंभ से ही यह साफ था कि मनरेगा कार्यस्थलों से फोटो अपलोड करने की बाध्यता उन निष्ठावान श्रमिकों को इससे बाहर कर देगी जिनके क्षेत्र में नेटवर्क ठीक नहीं हैं और जिस कारण से वे अपनी तस्वीर समय पर अपलोड नहीं कर पाते.

फर्जी श्रमिकों को रोक नहीं सकता : उन्होंने बोला कि इसके अतिरिक्त एनएमएमएस फर्जी श्रमिकों को रोक नहीं सकता, क्योंकि कोई भी आदमी दिन में 2 बार जाकर फोटो खिंचवा सकता है और एक मिनट भी काम किए बिना भुगतान पा सकता है. यह सामने आया है कि मनमाने ढंग से और नकली फोटोज़ अपलोड की जा रही हैं. यह सिर्फ़ एनएमएमएस की पूर्ण निष्क्रियता और व्यर्थता को दर्शाता है.

रमेश ने बोला कि कांग्रेस पार्टी ने केंद्र गवर्नमेंट ने मनरेगा के कार्यान्वयन में कई जरूरी बदलावों की लगातार मांग की है और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संबंधी संसद की स्थायी समिति ने भी इन मांगों का समर्थन किया है. उनका बोलना है कि फोटो अपलोड मॉडल एनएमएमएस ऐप को तुरन्त वापस लिया जाए, क्योंकि यह अव्यावहारिक और प्रतिकूल है. कार्य आधारित भुगतान की मूल भावना को दोबारा स्थापित किया जाए, जो कि मनरेगा का केंद्र बिंदु है.

रमेश ने यह भी बोला कि बीते दशक की स्थिर मजदूरी संकट की स्थिति को देखते हुए कांग्रेस पार्टी के 2024 लोकसभा चुनाव के ‘न्याय पत्र’ (घोषणा पत्र) में प्रस्तावित 400 रुपए रोजाना की न्यूनतम मजदूरी के वादे को लागू किया जाए. कांग्रेस पार्टी नेता ने बोला कि आधार आधारित भुगतान प्रणाली को जरूरी न किया जाए, क्योंकि यह भुगतान में देरी और श्रमिकों के काम से वंचित होने का कारण बन रही है. रमेश ने बोला कि मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर किया जाए, जैसा कि कानून में निर्धारित है और किसी भी देरी पर मुआवजा दिया जाए.

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