CSDS के सह-निदेशक संजय कुमार ने सार्वजनिक तौर पर मांगी माफी
नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर किए अपने पोस्ट पर आज लोकनीति सीएसडीएस (Lokniti-CSDS के सह-निदेशक संजय कुमार ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी। उन्होंने स्वीकार किया कि पोस्ट किए गए आंकड़े गलत थे और यह गलती डेटा टीम की चूक से हुई। संजय कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “मैं महाराष्ट्र चुनाव को लेकर किए गए एक्स पोस्ट के लिए ईमानदारी से माफी मांगता हूं। वर्ष 2024 लोकसभा और 2024 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों की तुलना करते समय गड़बड़ी हो गई। डेटा की रो को गलत ढंग से पढ़ लिया गया। एक्स पोस्ट को हटा लिया गया है। मेरी किसी तरह की गलत सूचना फैलाने की मंशा नहीं थी।”

भाजपा का पलटवार
कुमार की माफी के तुरंत बाद बीजेपी ने उन पर तीखा धावा बोला। पार्टी आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने लिखा, “माफी आ गई और संजय कुमार बाहर हो गए। यह वही योगेंद्र यादव के शिष्य हैं जिनकी हर भविष्यवाणी में बीजेपी हार रही होती है और जब नतीजे उलट आते हैं तो टीवी पर बैठकर सफाई देते हैं। उन्हें लगता है कि दर्शक मूर्ख हैं। कांग्रेस पार्टी के झूठे नैरेटिव को हवा देने के लिए बिना जांचे-परखे आंकड़े पेश किए गए।” मालवीय ने आगे बोला कि राहुल गांधी ने जिस संस्था के आंकड़ों का सहारा लेकर महाराष्ट्र के मतदाताओं पर प्रश्न उठाया था, अब वही संस्था मान रही है कि उसके आंकड़े गलत थे।
क्या था दावा?
संजय कुमार ने अब डिलीट किए गए पोस्ट में दावा किया था कि महाराष्ट्र की रामटेक विधानसभा सीट पर 2024 लोकसभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या 4,66,203 थी, जबकि विधानसभा चुनाव में यह घटकर 2,86,931 रह गई यानी लगभग 38.45% की कमी। इसी तरह देवलाली विधानसभा सीट पर लोकसभा चुनाव में 4,56,072 मतदाता थे, जबकि विधानसभा चुनाव में यह संख्या घटकर 2,88,141 हो गई यानी 36.82% की गिरावट।
महाराष्ट्र पर अब टकराव क्यों?
यह टकराव ऐसे समय में उभरा है जब विपक्षी गठबंधन INDIA और चुनाव आयोग के बीच विवाद तेज हो गया है। 7 अगस्त को राहुल गांधी ने बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में “वोट चोरी” का इल्जाम लगाया था। इसके बाद विपक्ष ने महाराष्ट्र के संदिग्ध आंकड़े का हवाला देते हुए बीजेपी और ईसीआई पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने हाल ही में बिहार में चुनाव आयोग की विशेष मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया यानी SIR को भी “चुनाव चुराने की साजिश” करार दिया था।

