पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाए जाने के विरोध में इंदौर में हुआ प्रदर्शन
protest in Pithampur : भोपाल से यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा पीथमपुर की रामकी कंपनी पहुंचे से यहां के लोग खासे नाराज हैं. इसके विरोध में गुरुवार को लोगों ने रैली निकाली. आज भी नगर बंद का आह्वान किया गया है. इधर पीथमपुर में कचरे का निस्तारण होने की समाचार से धार से लेकर इंदौर तक लोगों में भय नजर आ रही है.

पीथमपुर बंद को समर्थन : पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा चलाए जाने के विरोध में गुरुवार को इंदौर में भी प्रदर्शन हुआ. बोला जा रहा है कि इसका इंदौर और इसके आसपास के क्षेत्रों में भी जल संसाधन और खेती को भारी हानि पहुंचने का खतरा है. गवर्नमेंट को जनभावनाओं का ध्यान रखते हुए निर्णय करना चाहिए.
क्या है लोगों के प्रश्न : पीथमपुर में भोपाल के कचरे की पैकिंग करने गए अगले का पहले ब्लड टेस्ट कराया गया. इसके बाद इन लोगों से आधार कार्ड, समग्र आईडी लेकर उनका बीमा भी कराया गया. कंटेनर के ड्राइवर को हर घंटे के हिसाब से 5000 रुपए का भुगतान किया है. ऐसे में प्रश्न उठ रहे हैं कि जब कचरा निस्तारण में लगे लोगों पर इतना ध्यान दिया जा रहा है तो क्षेत्रीय लोगों के स्वास्थ्य की अनदेखी क्यों की गई. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कचरे की सतही जांच हुई और उसमें कैंसर कारक मर्करी और लेड है.
कांग्रेस ने भी किया विरोध : कांग्रेस पार्टी भी खुलकर पीथमपुर में जहरीला कमरा जलाने का विरोध कर रही है. प्रदेश कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मुद्दे में लोकसभा की पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन से मुलाकात दी. उन्होंने बोला राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे में सभी जनप्रतिनिधियों को एक साथ होना चाहिए. उन्होंने बोला कि इस कचरे की महामारी से इंदौर भी ग्रसित ना हो जाए. वहीं कांग्रेस पार्टी विधायक भंवर सिंह शेखावत ने बोला कि यदि कचरे से कोई हानि नहीं है तो इसे उज्जैन में ही क्यों नहीं जलाया जाता?
क्या कहे मुख्यमंत्री : इधर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बोलना है कि कचरे का निस्तारण उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर सावधानी से किया जा रहा है. कचरे का निपटान 40 वर्ष बाद कर रहे हैं. अब इसके नुकसानदायक असर कम हो गए. इसमें उपस्थित नेप्थाल का असर 25 वर्ष बाद खत्म हो जाता है.

