इन कारणों से गौरैया चिड़िया धीरे-धीरे होती जा रही है विलुप्त
देहरादून। आधुनिकता के साथ हमें बहुत सारी चीजें भले ही मिली हों लेकिन हमारी प्रकृति को ये चीजें हानि पहुंचाती जा रही हैं। ऐसा ही हो रहा है गौरैया के साथ। आज (20 मार्च) विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day 2025) है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शहरीकरण के चलते बाग-बगीचे समाप्त हो गए हैं। वहीं मोबाइल टावरों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि इनसे निकलने वाली रेडिएशन के चलते गौरैया गायब होती जा रही हैं। आपने बचपन में अक्सर घरों की मुंडेर और आंगन में चहचहाने और फुदकने वाली छोटी सी चिड़िया गौरैया को दाना चुगते देखा होगा। अब यह नन्ही चिड़िया धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। इसका मुख्य कारण शहरीकरण, रासायनिक प्रदूषण और रेडिएशन को बताया जा रहा है। पर्यावरणविद इसे चिंतनीय मानते हैं।
देहरादून के पर्यावरणविद आशीष गर्ग ने लोकल 18 से बोला कि गौरैया के संरक्षण के लिए हर वर्ष विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। हमें गौरैया विलुप्त होने के कारणों को जानने और उसे पर विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने बोला कि पुराने घर इस ढंग से बनाए जाते थे, जिनमें खिड़कियां, रोशनदान और मुंडेर आदि हुआ करते थे लेकिन आज हम मॉडर्न घर बना रहे हैं, जिनमें एसी आदि का इस्तेमाल करते हैं और इस तरह का स्ट्रक्चर नहीं बना रहे हैं, जहां पक्षी आकर बैठ जाया करें। देहरादून में शहरीकरण ने इस शहर को इतना बदल दिया है कि पहले जहां पेड़-पौधों की अधिकता हुआ करती थी, वहां आज बिल्डिंग्स बन गई हैं। इसके अतिरिक्त आज इतने खेत-खलिहान भी नहीं हैं और खेती होती भी है तो पेस्टीसाइड्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिनसे छोटे कीड़े मर जाते हैं और ऐसे में पक्षियों को भोजन नहीं मिल पा रहा है। पेड़ों की कमी, पर्यावरण प्रदूषण जिसमें वायु प्रदूषण आदि के चलते गौरैया में कमी देखी जा रही है। इनके संरक्षण की बहुत आवश्यकता है अन्यथा इनका केवल नाम ही रह जाएगा।
गौरैया के लिए खतरा रेडिएशन
आशीष गर्ग ने बोला कि आज हम 5G तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनके लिए मोबाइल टावर आदि लगाए जा रहे हैं, जो गौरेया समेत पक्षियों के जीवन के लिए खतरा बन रहे हैं। एक रिसर्च में पाया गया है कि पक्षियों की आंखों में ऐसा रसायन पाया जाता है, जो चुंबकत्व के प्रति संवेदनशील होता है। वे आसमान में उड़ते हुए चुंबकीय कम्पास के रास्ते पर चलते हैं, जिससे वे दिशा और साथी पक्षियों के साथ उड़ते हैं लेकिन मोबाइल टावर से निकलने वाली चुंबकीय तरंगें उनके इस पाथ को डिस्टर्ब करती हैं, जिससे वे अपने रास्ते से विचलित हो जाती हैं और भटक जाती हैं। इसके साथ ही ये रेडिएशन गौरैया की प्रजनन क्षमता और तंत्रिका तंत्र के लिए खतरा है।

