ED ने खोली बाइडेन की पोल, इस तरह से भारत को करना चाहते थे बर्बाद

भारतीय जनता पार्टी संसद में कई बार नेहरू-गांधी परिवार के सोरोस से संबंध का मामला उठा चुके हैं। ईडी की ताजा कार्रवाई में पता चला है कि सोरोस की संस्था ओएसएफ ने FEMA (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) का उल्लंघन करते हुए हिंदुस्तान में कई NGO को करोड़ों रुपये का फंड उपलब्ध कराया था। सूत्रों के मुताबिक, USAID के जरिए भी बड़ी धनराशि हिंदुस्तान में पहुंचाई गई, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर राष्ट्र के लोकतांत्रिक ढांचे को अस्थिर करने के लिए किया जाना था। प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में बेंगलुरु में ओएसएफ से जुड़े 8 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान दस्तावेजों के ढेर बरामद किए थे, जिनसे इस षड्यंत्र का भंडाफोड़ हुआ।
भारत में तानाशाही फैलाने के लिए हुआ सोरोस-USAID गठजोड़
जांच एजेंसी का बोलना है कि सोरोस और USAID का यह गठजोड़ हिंदुस्तान में तानाशाही फैलाने की प्रयास का हिस्सा था। करीब 25 करोड़ रुपये की एक मनी ट्रेल का खुलासा हुआ है, जो विदेशी निवेश के नाम पर शेल कंपनियों के जरिए हिंदुस्तान लाई गई। प्रवर्तन निदेशालय ने इसे पूरे मुद्दे में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। सूत्रों का दावा है कि इस फंडिंग का मकसद कुछ खास सियासी दलों और संगठनों को मजबूत करना था, जो गवर्नमेंट के विरुद्ध माहौल बनाने में जुटे थे।
USAID को लेकर अमेरिका पर उठे सवाल
इस खुलासे के बाद राजनीतिक हलकों में खलबली मच गया है। सत्ताधारी दल ने सोरोस पर पहले भी हिंदुस्तान विरोधी गतिविधियों का इल्जाम लगाया था, और अब USAID के कथित रोल ने मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। प्रवर्तन निदेशालय अब इस बात की तह तक जा रही है कि USAID से मिले फंड का आखिरी इस्तेमाल कहां और कैसे हुआ। जांच के नतीजे आने के बाद सोरोस और उनके सहयोगियों पर बड़ी कानूनी कार्रवाई की आसार जताई जा रही है। यह मुद्दा न केवल भारत-अमेरिका संबंधों पर प्रश्न उठा रहा है, बल्कि विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग पर भी बहस छेड़ रहा है। प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई सोरोस की षड्यंत्र को बेनकाब करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है

