ईडी ने कर्नाटक के एमयूडीए मामले में सामने आई बड़ी अपडेट
बेंगलुरु: मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) मुद्दे में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने छापेमारी की. इस मुद्दे में प्रवर्तन निदेशालय ने कर्नाटक के सीएम सिद्धरमैया, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य के विरुद्ध मुद्दा दर्ज किया है. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल के साथ पहुंचे संघीय जांच एजेंसी के अधिकारी मैसूरु स्थित एमयूडीए कार्यालय तथा कुछ अन्य स्थानों पर छापेमारी कर रहे हैं. उन्होंने बोला कि सीएम या उनके परिवार के किसी परिसर पर छापेमारी नहीं की जा रही है.

एमयूडीए दस्तावेजों की जांच
सूत्रों के अनुसार, ऑफिसरों की मौजूदगी में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी मैसूरु कार्यालय में एमयूडीए दस्तावेजों की जांच कर रहे हें. अपनी जांच के अनुसार वे जरूरी डॉक्यूमेंट्स बरामद कर सकते हैं. संघीय एजेंसी ने कुछ हफ्ते पहले लोकायुक्त द्वारा हाल में दर्ज प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए सीएम और अन्य के विरुद्ध मुद्दा दर्ज करने के लिए प्रवर्तन मुद्दा सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दाखिल की थी. सीएम एमयूडीए द्वारा उनकी पत्नी को 14 स्थलों के आवंटन में अनियमितता के आरोपों का सामना कर रहे हैं. सिद्धरमैया, उनकी पत्नी बी।एम।पार्वती, उनके साले मल्लिकार्जुन स्वामी और देवराजू (जिनसे स्वामी ने जमीन खरीदकर पार्वती को उपहार में दिया था) तथा अन्य के नाम मैसूर स्थित लोकायुक्त पुलिस द्वारा 27 सितंबर को दर्ज प्राथमिकी में शामिल हैं.
एमयूडीए स्थल आवंटन मुद्दे में इल्जाम है कि एमयूडीए ने सिद्धरमैया की पत्नी की जमीन ‘‘अधिगृहित’’ की थी और इसके बदले उन्हें मैसूरु के एक रिहायशी क्षेत्र (विजयनगर लेआउट तीसरे और चौथे चरण) में 14 प्रतिपूरक स्थल आवंटित किए थे, जिनका संपत्ति मूल्य उनकी भूमि के जगह की तुलना में अधिक था. एमयूडीए ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ भूमि के बदले 50:50 अनुपात योजना के अनुसार भूखंड आवंटित किए थे, जहां आवासीय लेआउट विकसित किया गया था.
50 फीसदी विकसित भूमि आवंटित
विवादास्पद योजना के तहत, एमयूडीए ने आवासीय लेआउट बनाने के लिए अधिग्रहण के अनुसार जमीन देने वालों को उनसे ली गई अविकसित भूमि के बदले में 50 फीसदी विकसित भूमि आवंटित की थी. इल्जाम है कि मैसूरु तालुका के कसाबा होबली के कसारे गांव के सर्वे नंबर 464 में स्थित 3.16 एकड़ जमीन पर पार्वती का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. टकराव प्रारम्भ होने के बाद पार्वती ने घोषणा की थी कि वह आवंटित भूखंड एमयूडीए को वापस कर देंगी. सीएम ने अपनी या अपने परिवार की, किसी भी तरह के गलत काम में संलिप्तता के इल्जाम से इनकार किया और बोला कि विपक्ष उनसे ‘‘डरा हुआ’’ है. उन्होंने बोला था कि यह उनके विरुद्ध पहला ऐसा ‘‘राजनीतिक मामला’’ है

