आज भी संघ और बीजेपी एक दूसरे के पूरक हैं : पीएम मोदी
Narendra Modi and Atal Bihari Vajpayee: पीएम नरेंद्र मोदी ने 30 मार्च को नागपुर में आरएसएस के हेडक्वार्टर पहुंचकर ये संदेश देने का काम किया है कि आज भी संघ और भाजपा एक दूसरे के पूरक हैं। संघ जहां वैचारिकी प्रदान करने का काम करता है तो भाजपा उस विचार को कार्यान्वित करने का काम करती है। ‘मोदी युग’ में इस मैसेज को देने की आवश्यकता इसलिए महसूस की गई क्योंकि हालिया वक्त में ये धारणा बनती दिखी कि संघ के बिना भाजपा अपनी यात्रा करने में अब सक्षम है। 2024 के लोकसभा चुनावों में बने इस नैरेटिव का असर ये हुआ कि भाजपा अपने दम पर बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं छू सकी। दोनों पक्षों में संवादहीनता दिखी। भाजपा पर संघ के असर को अतीत की बात बोला जाने लगा। लिहाजा मोदी ने पीएम बनने के 11 वर्ष बाद संघ के कार्यालय पहुंचकर उसको हिंदुस्तान की अमर संस्कृति का ‘वट वृक्ष’ बताकर संघ और भाजपा के बीच बनती दिख रही खाई को पाटने का कारगर संदेश दिया है।

इस मुद्दे में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी कहीं न कहीं दिवंगत पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के करीब नजर आते हैं। अटल जी के पीएम बनने के बाद भी संघ के साथ उनके रिश्तों को लेकर तमाम बातें की जाती रहीं। अटल बिहारी वाजपेयी ने साल 2000 में अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान संघ के हेडक्वार्टर जाकर दोनों पक्षों के बीच एकजुटता का संदेश दिया था। उसके बाद प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी नागपुर में आरएसएस मुख्यालय का दौरा करने वाले दूसरे पीएम हैं। वाजपेयी की तरह यह ‘संयोग’ ही है कि मोदी का भी शीर्ष पद पर तीसरा कार्यकाल है।
संघ का शताब्दी वर्ष
ऐसा नहीं कि केवल भाजपा को ही संघ की आवश्यकता है। संघ के मुद्दे में भी ये बात लागू होती है। इस वर्ष संघ अपनी स्थापना के 100वें साल को पूरा कर रहा है। उसके लिए भी संदेश देने का वक्त है कि संघ ने राष्ट्रीय राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के एक आंदोलन के रूप में आरंभ करके उपेक्षा और उपहास से जिज्ञासा और स्वीकार्यता की यात्रा पूर्ण की है। उसकी वैचारिक धारा आज सत्ता के शिखर तक काबिज है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बोला भी कि पिछले 100 सालों में आरएसएस के अपने संगठन के साथ की गई ‘तपस्या’ का फल मिल रहा है, क्योंकि राष्ट्र 2047 में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है।
उन्होंने बोला कि 1925-47 का समय संकट का समय था, क्योंकि राष्ट्र आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था और अब 100 सालों के बाद आरएसएस एक और मील के पत्थर की ओर अग्रसर है। मोदी ने कहा, ‘‘2025 से 2047 तक का समय जरूरी है, क्योंकि हमारे सामने बड़े लक्ष्य हैं। हमें अगले 1,000 वर्ष के मजबूत और विकसित हिंदुस्तान की आधारशिला रखनी है।’’
उन्होंने रेखांकित किया देश इस साल संविधान की 75वीं वर्षगांठ इंकार रहा है और आरएसएस अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर रहा है। यानी मोदी ने राष्ट्र निर्माण के लिए विजन को शेयर करते हुए संघ और भाजपा के भविष्य की राह पर एक सुर में कदमताल को लेकर उद्घोष कर दिया है।

