Explainer : अटल बिहारी वाजपेयी ने देखा था भारत को परमाणु सम्पन्न देश बनाने का सपना
What is Nuclear Triad : पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदुस्तान को परमाणु सम्पन्न राष्ट्र बनाने का सपना देखा था। वर्ष 1998 में जब अटल बिहारी वाजपेयी पीएम थे तब हिंदुस्तान ने परमाणु परीक्षण किया था। उनके इस निर्णय से दुनिया दंग रह गई थी। 11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में एक के बाद एक लगातार तीन सफल परीक्षण के बाद हिंदुस्तान न्यूक्लियर स्टेट बन गया था।

यह अटल बिहारी वाजपेयी की सोच का ही नतीजा था कि उस समय की केंद्र गवर्नमेंट राष्ट्र की परमाणु नीति का और परमाणु अस्त्रों को तैनात करने के विकल्प का पुनर्मूल्यांकन करने को तैयार हो गई थी। तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने भी सेना की मांग सामने रखी थी। उन्होंने बोला था कि शत्रु राष्ट्रों की परमाणु अस्त्रों और मिसाइलों की बढ़ती चुनौतियों का सामना करने के लिए गवर्नमेंट सेना की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता विकसित करे।
वाजपेयी ने रखी थी परमाणु कार्यक्रम की नींव
अगर अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदुस्तान के परमाणु कार्यक्रम की नींव रखी तो उसे आगे बढ़ाने का काम 2014 में बनी नरेंद्र मोदी गवर्नमेंट ने किया। मोदी गवर्नमेंट ने इस दिशा में जरूरी काम किए हैं। उसी की वजह से सेना के तीनों अंगों, जल, थल और वायु सेना को लगातार आधुनिक परमाणु हथियारों से लैस किया जा रहा है। आज इंडियन आर्मी के पास आधुनिकतम मिसाइलों का जखीरा है। वायु सेना को भी राफेल सरीखे फाइटर प्लेन लाकर मजबूत किया गया है। नेवी को भी लगातार सशक्त बनाने का कोशिश जारी है।
आईएनएस अरिघात उसी कड़ी का एक हिस्सा
गुरुवार को भारतीय नौसेना में शामिल होने जा रही आईएनएस अरिघात सबमरीन उसी कड़ी का एक हिस्सा है। इस पनडुब्बी को दुश्मनों के लिए काल कहा जा रहा है। परमाणु बम से लैस आईएनएस अरिघात 750 किलोमीटर दूर तक तबाही मचा सकता है। आईएएनएस अरिघात के-15 मिसाइल से लैस होगा, जो काफी घातक हैं। भारतीय नौसेना में पहले शामिल हो चुके आईएएनएस अरिहंत और अरिघात में काफी समानता है। आईएनएस अरिघात राष्ट्र के ‘परमाणु त्रय’ या जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु धावा करने की क्षमता को मजबूत करने के लिए समंदर में तैनात हो जाएगा।
कई विशेषताओं से लैस है यह सबमरीन
आईएनएस अरिघात सबमरीन की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह परमाणु ऊर्जा से चलती है और महीनों तक पानी में डूबी रह सकती है। यह समंदर में घात लगाकर दुश्मनों को खोज-खोज कर सफाया करेगी। इस प्रकार की हिंदुस्तान की यह दूसरी पनडुब्बी है। साथ ही यह पनडुब्बी दुश्मनों को पता लगे बिना ही धावा करने में सक्षम है। यह दुश्मन की नजर से बची भी रह सकती है और शत्रु पर अचानक धावा करने की भी क्षमता रखती है।
अगले वर्ष मिलेगा आईएनएस अरिदमन
भारतीय नौसेना तब और शक्तिशाली हो जाएगी जब तीसरा एसएसबीएन (परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ परमाणु-चालित पनडुब्बियों के लिए नौसैनिक भाषा), थोड़ा बड़ा 7,000 टन का जहाज अगले वर्ष कमीशंड हो जाएगा। आईएनएस अरिदमन कहलाने वाला यह जहाज के-4 मिसाइलें अपने साथ ले जाएगा जो 3,500 किमी दूर लक्ष्य पर वार कर सकती हैं।
बन रहा है चौथा एसएसबीएन
देश के परमाणु त्रय के तीनों अंगों में समुद्री ताकत ही अपेक्षाकृत कुछ कमजोर पड़ रही थी। उसे और मजबूती देने के लिए 90,000 करोड़ रुपये की लागत से उन्नत प्रौद्योगिकी पोत (एटीवी) परियोजना के अनुसार एक चौथा एसएसबीएन भी बनाया जा रहा है। एसएसबीएन नौसेना के लिए इसलिए भी जरूरी हैं क्योंकि उनका पता लगाना कठिन है। इसकी विशेषता यह होगी कि शत्रु द्वारा किए गए अचानक हमले से बच सकता है और जवाबी धावा करने में सक्षम होगा।

