भारतपे के पूर्व एमडी अशनीर ग्रोवर पर लगा 2 लाख रुपये का जुर्माना
नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को फिनटेक कंपनी के विरुद्ध कथित अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट के उत्तर में भारतपे के पूर्व एमडी अशनीर ग्रोवर पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने ग्रोवर द्वारा पहले के आदेशों और आश्वासनों के लगातार और साफ उल्लंघन पर निराशा जताई.
इस व्यवहार से स्तब्ध न्यायाधीश ने ग्रोवर को अपने वचनपत्र से बाध्य करते हुए मुद्दे को बंद करने का निर्णय किया, लेकिन 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. न्यायालय ने हाई कोर्ट के क्लर्क एसोसिएशन को भुगतान का निर्देश दिया.
अदालत ने ग्रोवर की माफ़ी और वचन को रिकॉर्ड में ले लिया, लेकिन यह कहते हुए जुर्माना लगाने की कार्रवाई आगे बढ़ा दी कि इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता.
वादी – भारतपे, रेजिलिएंट इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के मालिक के लिए वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने ग्रोवर द्वारा न्यायालय के आदेशों के लगातार उल्लंघन की ओर इशारा किया और न्यायालय से उन्हें अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा जारी करने का आग्रह किया.
जवाब में, ग्रोवर के वकील ने अपने मुवक्किल की माफी और भविष्य में आपत्तिजनक पोस्ट से परहेज करने के वचन का उल्लेख करते हुए मुद्दे को निपटाने का सुझाव दिया.
वकील ने टकराव सुलझाने के लिए मध्यस्थता का भी प्रस्ताव रखा.
इससे पहले, न्यायालय ने अश्नीर ग्रोवर और फिनटेक कंपनी के ऑफिसरों को एक-दूसरे के विरुद्ध “असंसदीय” या “अपमानजनक” ढंग से नहीं बोलने का निर्देश दिया था.
दिल्ली पुलिस की आर्थिक क्राइम शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा ग्रोवर और उनके परिवार के सदस्यों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के बाद भारतपे ने एक आवेदन दाखिल किया था, जिसमें इल्जाम लगाया गया था कि ग्रोवर तब से अपमानजनक बयान ट्वीट कर रहे हैं.
भारतपे ने ग्रोवर के पहले के ट्वीट्स से संबंधित अपने पहले से लंबित मानहानि मुकदमे में आवेदन दाखिल किया.
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने बोला था, “यह शहर के कोने में कुछ प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के बीच सड़क पर होने वाली लड़ाई नहीं है. ये कॉर्पोरेट लोग हैं, शिक्षित लोग हैं, स्पष्टवादी लोग हैं जो निश्चित रूप से एक-दूसरे के विरुद्ध अपनी शिकायतों का निपटारा अधिक परिष्कृत ढंग से कर सकते हैं.”
“अगर तुम दोनों ने गटर में घुसने का निर्णय कर लिया है तो प्लीज वहीं रहो.”
फिनटेक कंपनी की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील राजीव नायर और दयान कृष्णन ने ग्रोवर के कुछ ट्वीट्स का हवाला दिया था, जिसमें इल्जाम लगाया गया था कि कंपनी ने “वकीलों और फिक्सरों” पर कई करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
वकील ने तर्क दिया कि यदि ग्रोवर को कंपनी की कम्पलेन से कोई परेशानी है तो वह अपने विरुद्ध भारतपे की कम्पलेन और दिल्ली पुलिस की एफआईआर पर न्यायालय में टकराव कर सकते हैं.
भारतपे के ऑफिसरों के कुछ ट्वीटों पर प्रकाश डालते हुए ग्रोवर की ओर से पेश वकील गिरिराज सुब्रमण्यम ने बोला था कि भारतपे के ऑफिसरों ने सोशल मीडिया पर उनके मुवक्किल के विरुद्ध इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है और प्रेस में ग्रोवर के विरुद्ध इल्जाम लगाए हैं.
इसके बाद पीठ ने बोला कि दोनों पक्षों को इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए.
अदालत ने आदेश दिया, “नोटिस जारी करें, सभी प्रतिवादियों के विद्वान वकील श्री सुब्रमण्यम नोटिस स्वीकार करें. 20 मई तक उत्तर दाखिल करें, 22 मई तक प्रत्युत्तर दाखिल किए जाएं. 24 मई को रोस्टर बेंच के समक्ष सूची पेश की जाए.”
अदालत ने वकील ने निवेदन किया कि वे अपने मुवक्किलों को एक-दूसरे के विरुद्ध असंसदीय और अपमानजनक प्रकाशन का सहारा लेने से बचने की राय दें. सुब्रमण्यम ने बोला कि वह ग्रोवर को अधिक शालीन भाषा का इस्तेमाल करने की राय देंगे.
फंड के दुरुपयोग के इल्जाम में ग्रोवर और उनकी पत्नी को कंपनी से बर्खास्त किए जाने के महीनों बाद भारतपे ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
2,800 पन्नों के अपने मुकदमे में भारतपे ने कथित फर्जीवाड़ा और धन के दुरुपयोग के लिए ग्रोवर, उनकी पत्नी और उनके भाई से 88.67 करोड़ रुपये के हानि का दावा किया है.
फिनटेक कंपनी ने दावा किया कि राजस्थान स्थित एक ट्रैवल कंपनी ने दो बार विदेशी दौरों के लिए चालान काटा था, एक बार ग्रोवर और उनकी पत्नी के लिए और दूसरी बार उनके बच्चों के लिए. परिवार ने विदेश यात्रा के लिए भी कंपनी के फंड का इस्तेमाल किया.
मुकदमे में आगे दावा किया गया कि ग्रोवर्स ने कंपनी के फंड का इस्तेमाल अपने पॉश डुप्लेक्स का किराया और सुरक्षा जमा और घरेलू उपकरणों के भुगतान के लिए भी किया. मुकदमे में दावा किया गया कि डुप्लेक्स को पहले ग्रोवर्स ने कंपनी के गेस्ट हाउस के रूप में अपने कब्जे में ले लिया था, लेकिन अंततः उन्होंने वहां रहना प्रारम्भ कर दिया.

