गहलोत ने विपक्ष की बयानबाजी की आलोचना करते हुए दिया यह बयान
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव आयोग और राष्ट्र की जांच एजेंसियों पर दबाव में काम करने का इल्जाम लगाते हुए प्रश्न उठाए हैं. गहलोत ने बिहार में निष्पक्ष चुनाव होने पर भी शक जताया. गहलोत ने मीडिया से वार्ता में बोला कि राष्ट्र में लोकतंत्र कमजोर हो रहा है. सरकार

गहलोत ने कहा- चुनाव आयोग ने बिहार में एक नया शिगूफा छोड़ दिया, मैं स्वयं पटना जा कर आया हूं. इसका परसों वहां बहुत भारी रिएक्शन है. मेरे ड्राइवर कह रहे थे साहब कि आप बताइए मेरे से मां बाप से डेट ऑफ बर्थ सर्टिफिकेट मांग रहे हैं. मैं कहां से लेकर आऊंगा? इनकी प्रोसेस से लाखों लोग वंचित रह सकते हैं. ये स्थिति बन गई है. कैसे डेमोक्रेसी रहेगी. बिहार में चुनाव निष्पक्ष कैसे होंगे बता दीजिए. चुनाव आयोग किसके कहने से यह सब लेकर आया. कोई नया नीतिगत निर्णय करते हैं तो विपक्ष को भी इन्वॉल्व किया जाता है. आप एकतरफा निर्णय कर रहे हैं , बहुत ही चिंताजनक स्थिति है.
ज्युडिशियरी, चुनाव आयोग दबाव में हो वहां किस लोकतंत्र की बात कर रहे
गहलोत ने कहा- आप सोच सकते हो कि राष्ट्र बोला जा रहा है, सब दबाव में काम कर रहे हैं. इनकम टैक्स, ईडी, CBI ये तीनों संस्थाएं दबाव में हैं. ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई, इनकी जो किरदार है, वो देशहित में है. लेकिन जो दबाव में इनको लिया गया है. इससे विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ अन्याय हो रहा है. वो जगजाहिर है.
गहलोत ने कहा- संसद में उत्तर आया है. 193 केसेज इन्होंने किए हैं. सिर्फ़ दो प्रूव कर पाए हैं. मतलब एक प्रतिशत. कितना तंग किया होगा लोगों को. उनके परिवार वालों पर क्या बीती होगी? जिस देश में ये स्थिति चल रही हो, दबाव में ज्युडिशियरी, इलेक्शन कमीशन और ब्यूरोक्रेसी हो. कैसे डेमोक्रेसी की बात वो करते हैं? डेमोक्रेसी कमजोर होती जा रही है. ये भलाई में नहीं है. सोचने वाली बात है.
कांग्रेस नेताओं के साथ चुनाव आयोग का व्यवहार निंदनीय गहलोत ने कहा- मैं लंबे अरसे से कह रहा हूं कि राष्ट्र किस दिशा में जा रहा है, किस दिशा में जाएगा, उसका नमूना ये है. चुनाव आयोग में कांग्रेस पार्टी नेताओं के साथ जो व्यवहार किया गया है. ऐसा आजादी के बाद कभी नहीं हुआ. कोई भी चुनाव आयोग का प्रमुख रहा हो या मेंबर रहा हो. ऐसा व्यवहार पहले नहीं किया. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. मैने कभी सुना ही नहीं, हम लोग भी कई बार गए हैं.
हमने भी कई ऐसी बातें कहीं होंगी. उससे हो सकता है ईसीआई प्रमुख को या मेंबर को अच्छा नहीं लगा होगा. तब भी उनका व्यवहार बड़ा शालीनता से होता था. यह उनकी ड्यूटी भी है कि कोई नागरिक है, राष्ट्र का मतदाता कोई भी है, किसी दल का नेता है. उसको संयम से सुनें और निष्पक्ष निर्णय करें.
राहुल गांधी के प्रश्नों को उत्तर नहीं दिया, उन्हें आर्टिकल लिखना पड़ा
गहलोत ने कहा- बहुत बड़ी ड्यूटी है, इलेक्शन कमीशन ऑफ इण्डिया किसे कहते हैं, जिसके ऊपर पूरा चुनाव डिपेंड करता है. बहुत बड़ी संस्था है. बहुत क्रेडिबल संस्था है. उसके बारे में जो कल परसों से सुन रहे हैं. जो व्यवहार किया गया है, वो बहुत ही अशोभनीय है. इसकी किन शब्दों में आलोचना करूं मेरी समझ नहीं आ रहा है.
गहलोत ने कहा- पहले भी राहुल गांधी ने महाराष्ट्र को लेकर कई प्रश्न उठाए थे. उसका भी ये लोग प्रॉपर उत्तर नहीं दे पाए. उनको आर्टिकल लिखना पड़ा, उसका कोई उत्तर नहीं तो ये व्यवहार इलेक्शन कमीशन के पार्ट पर किसी भी ढंग से उचित नहीं बोला जा सकता. मेरे ख्याल से इसका रिएक्शन पूरे राष्ट्र के अंदर है और बहुत विशाल रिएक्शन है.
भजनलाल गवर्नमेंट के जुमले पर आरएसएस, भाजपा नेता हंस रहे
पांच वर्ष बनाम डेढ़ वर्ष के मुख्यमंत्री भजनलाल के बयान पर गहलोत ने बोला कि ये तो भाजपा वाले स्वयं ही हंस रहे होंगे. उनका पांच वर्ष बनाम डेढ़ वर्ष का जुमला है, उस पर मैं समझता हूं आरएसएस वाले और भाजपा के इंटेलेक्चुअल लोग हैं , जो राजनीति को समझते हैं, वे ह सब मन में हंस रहे होंगे कि बोल क्या रहे हैं? मेरा यह मानना है, वे स्वयं हंस रहे होंगे मैं क्या कमेंट करूं? मैं तो कमेंट कर चुका हूं कि यह बात कह कर बहुत बड़ा साहस दिखाया है, हौसला की बात है कि पांच वर्ष बनाम डेढ़ साल, वह भी भजनलाल गवर्नमेंट के इससे बड़ी बात क्या हो सकती है?

