राष्ट्रीय

गिरिडीह: इस अनोखी परंपरा का हिस्सा रह चुकी हैं तीन पीड़ियाँ

देशभर में दुर्गापूजा का त्योहार भव्यता से मनाया जा रहा है, और बड़े-बड़े पंडालों से लेकर बहुत बढ़िया आयोजनों तक, हर स्थान उत्साह देखने को मिलता है पूजा के आयोजन के लिए आमतौर पर भारी मात्रा में चंदा इकट्ठा किया जाता है, जिसमें बड़े लोग अपना योगदान देते हैं लेकिन गिरिडीह के न्यायालय रोड पर स्थित दुकानदार इस परंपरा को एक अनोखे अंदाज में निभाते हैं यहां के दुकानदार प्रत्येक दिन अपनी दुकान की पहली बिक्री यानी बोहनी से प्राप्त राशि को दुर्गापूजा के आयोजन के लिए अलग रखते हैं

768 384 16548930 thumbnail 3x2 girpuja

WhatsApp Group Join Now

श्री दुर्गा मिष्ठान भंडार के मालिक रंजीत दास ने इस अनोखी परंपरा के बारे में बताते हुए बोला कि उनके दादाजी लक्ष्मी नारायण दास ने 1955 में इस परंपरा की आरंभ की थी तब से लेकर अब तक यह परंपरा तीन पीढ़ियों से लगातार चलती आ रही है दुकान में जो पहला ग्राहक आता है और जितनी राशि की खरीदी करता है, उसे विशेष रूप से दुर्गापूजा के लिए अलग गुल्लक में जमा कर दिया जाता है प्रत्येक दिन की बोहनी की यह राशि चाहे अधिक हो या कम, उसे अलग से रखा जाता है और सालभर तक यह धनराशि इकट्ठा होती है

तीन पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा
रंजीत दास ने लोकल18 से बात करते हुए कहा कि इस परंपरा के अनुसार हर वर्ष लगभग 80 से 90 हजार रुपये तक की राशि इकट्ठा हो जाती है इस वर्ष यह राशि 85 हजार रुपये रही, जो कि दुर्गापूजा के आयोजन में इस्तेमाल की जाएगी उन्होंने कहा कि यहां दुर्गापूजा का आयोजन बंगाली रीति-रिवाजों के मुताबिक किया जाता है, जहां मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित कर पूजा की जाती है

अन्य दुकानदारों के लिए प्रेरणा
इस अनोखी परंपरा ने गिरिडीह के अन्य दुकानदारों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत का काम किया है दुकान के पहले ग्राहक से हुई बिक्री को अलग रखना और उसे धार्मिक कार्यों में लगाना इस बात को दर्शाता है कि क्षेत्रीय व्यवसायी केवल अपने व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज और संस्कृति में भी अपनी किरदार निभाते हैं

गुल्लक में बोहनी का पैसा होता है जमा
रंजीत दास ने यह भी कहा कि उनके दादाजी ने इस परंपरा की आरंभ एक छोटे से व्यवसाय के साथ की थी उस समय से लेकर अब तक, चाहे व्यवसाय कितना भी बड़ा या छोटा हो, पहली बिक्री की राशि को हमेशा गुल्लक में जमा किया जाता है यही पैसा सालभर में जमा होकर दुर्गापूजा के आयोजन में सहायक बनता है

निष्कर्ष
गिरिडीह के दुकानदारों की यह अनूठी परंपरा न सिर्फ़ धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे क्षेत्रीय लोग अपने व्यवसाय से समाज और संस्कृति के लिए सहयोग करते हैं यह परंपरा तीन पीढ़ियों से चली आ रही है और आने वाले समय में भी इसे बनाए रखने का संकल्प है इससे न सिर्फ़ दुर्गापूजा का आयोजन भव्य ढंग से होता है, बल्कि यह समाज के अन्य हिस्सों के लिए एक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है

Back to top button