पैरों में एक गोलाकार डिवाइस लगाकर चुनाव में उतरे हाफिज सिकंदर
जम्मू-कश्मीर में 10 वर्ष के बाद विधानसभा चुनाव हो रहे है। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद के बाद पहली बार चुनाव हो रहा है। सभी पार्टियों के उम्मीदवार जीत दर्ज करने के लिए चुनावी मैदान में एड़ी चोटी का बल लगाए हुए हैं। लेकिन, चुनाव के बीच बांदीपुरा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार हाफिज मोहम्मद सिकंदर मलिक की तस्वीर खूब वायरल हो रही है। उनके पैरों में एक गोलाकर डिवाइस लगा हुआ है। इसकी खूब चर्चा हो रही है। आपको बता दें कि हाफिज सिकंदर प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी कश्मीर (जेऐआई) के पूर्व जिला अध्यक्ष हैं।

दरअसल, 2019 में गृह मंत्रालय ने जमात-ए-इस्लामी कश्मीर अवैध गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के अनुसार प्रतिबंधित कर दिया था। जेऐआई के सदस्य होने के नाते सिकंदर को गवर्नमेंट ने कारावास में डाल दिया था। जेऐआई पर कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए आतंकवाद और हिंदुस्तान विरोधी प्रचार करने का इल्जाम है। लेकिन, सिकंदर को पिछले वर्ष 2 दिसंबर 2023 को जमानत पर रिहा कर दिया गया था। मगर, पुलिस उनके पैर में जीपीएस ट्रैकर लगाया है, ताकि उनके सभी गतिविधियों पर नजर रखा जा सके।
बांदीपुरा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार हाफिज मोहम्मद सिकंदर मलिक ने पुलिस के इस एक्शन पर ऐतराज जाताया है। उन्होंने इसे निजता का हनन कहा है। उन्होंने बोला कि जमानत के बाद जब मैं घर आया तो घरवाले मेरे पास आने से डरते थे। उनको लगता था कि पुलिस उन सबकी बातों को भी सुन रही है। आपको बता दे कि सिकंदर को प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी कश्मीर का समर्थन प्राप्त है।
सिकंदर ने कहा कि ट्रैकर को लगभग तीन महीने पहले न्यायालय के निर्देश पर लगाया गया था। यह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जमात-ए-इस्लामी के विरुद्ध जांच किए जा रहे एक मुद्दे से संबंधित था। आपको बता दें कि धार्मिक-राजनीतिक संगठन जमात-ए-इस्लामी कश्मीर को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं है। केंद्र ने फरवरी 2019 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, इसने 10 निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन करते हुए लगभग चार दशकों के बाद अप्रत्यक्ष रूप से इस चुनावी मैदान में प्रवेश किया है

