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Haryana Assembly Session: इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में मचा भारी बवाल

Haryana Assembly Session: हरियाणा में पूर्व की हुड्डा गवर्नमेंट के समय 2008-2009 में हुई पुलिस इंस्पेक्टर की भर्ती को लेकर मंगलवार को विधानसभा में हंगामा हुआ. बीजेपी ने नौकरियों में भाई-भतीजावाद करने और पर्ची-खर्ची का इल्जाम लगाते हुए प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी को घेरा. इस मामले पर दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक विवाद हुआ. स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी. इस दौरान पूर्व स्पीकर डाक्टर रघुबीर सिंह कादियान की स्पीकर हरविन्द्र कल्याण के साथ तीखी बहस भी हुई.

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माहाैल बिजली मंत्री अनिल विज की हुड्डा के प्रति की गई टिप्पणी से और भी गरमा गया. नारेबाजी करते हुए कांग्रेस पार्टी के कई विधायक स्पीकर वेल तक भी पहुंचे. इस मामले पर कांग्रेसियों ने वॉकआउट भी किया. जिस समय यह पूरा टकराव हुआ उस समय पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सदन में उपस्थित नहीं थे.

सीएम नायब सिंह सैनी ने भी कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट में नौकरियों की बंटरबांट होने के इल्जाम लगाए. गुस्से में नजर आए स्पीकर सदन में हुई तीखी बहस और नारेबाजी को लेकर दोनों पक्षों को फटकार लगाते भी दिखे.

पूर्व मंत्री और नारनौल से बीजेपी विधायक ओमप्रकाश यादव ने शून्यकाल में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा इस भर्ती को दिए गए निर्णय और टिप्पणी को सदन में उठाया. यादव ने बोला कि पूर्व की कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट में हुई 20 पुलिस इंस्पेक्टरों की सीधी भर्ती में सीएम सहित दूसरे नेताओं के संबंधियों का चयन किया गया. उन्होंने बोला कि इस परीक्षा के टाॅपर युवा का नाम लिस्ट से फल्यूड से काट दिया गया. उसका नाम लिस्ट में सबसे नीचे रखा गया.

कांग्रेस ने इसका विरोध किया तो संसदीय कार्य मंत्री महिपाल सिंह ढांडा ने बोला – हर मामले पर अखबार लेकर सदन में आने वाले कांग्रेसी आज का अखबार क्यों नहीं लेकर आए. वे अब क्यों नहीं अखबार सदन में लहरा रहे और यह बता रहे कि कांग्रेस पार्टी राज में किस तरह से भर्तियों में गड़बड़ी होती थी. टकराव अधिक बढ़ा तो सीएम नायब सिंह सैनी ने बोलाउच्च न्यायालय के निर्णय से एक बार फिर साफ हो गया है कि कांग्रेस पार्टी राज में नौकरियों में बंदरबांट होती थी.

उन्होंने बोला कि जो बच्चा टॉपर था, उसका चयन नहीं किया गया. उसकी स्थान पानीपत के एक सम्बन्धी के बेटे को जॉब दे दी गई. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने इस भर्ती मुद्दे को लेकर गवर्नमेंट से उच्च न्यायालय में जाने का आग्रह किया ताकि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके.

उन्होंने बोला कि नौकरियों में भेदभाव करना कांग्रेस पार्टी का पुराना कल्चर रहा है. वहीं मुख्यमंत्री ने फिर दोहराया कि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी नेता पचास वोट पर एक जॉब देने की बात कह रहे थे.

यूं बढ़ता गया विवाद

बिजली और परिवहन मंत्री अनिल विज ने उच्च न्यायालय के इस निर्णय को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रति टिप्पणी की. इस पर रघुबीर सिंह कादियान, कुलदीप वत्स और अशोक अरोड़ा सहित कांग्रेस पार्टी के कई विधायक भड़क गए. हंगामा बढ़ा तो कांग्रेसी अपनी सीटों से खड़े हो गए. स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने विज की टिप्पणी को सदन से हटवा भी दिया.

इसके बाद विज फिर से उठे और उन्होंने अपने पुराने शब्दों को तो नहीं दोहराया, लेकिन उनमें फेरबदल करके वैसी ही बात फिर से कह दी, जिससे कांग्रेसी फिर से भड़क उठे. दोनों ओर से एक-दूसरे पर टिप्पणी की गई. हालांकि स्पीकर ने विज के इस्तेमाल किए गए इन शब्दों को भी सदन की कार्रवाई से निकलवा दिया गया.

पूर्व और मौजूदा स्पीकर भिड़े

इंस्पेक्टर भर्ती के मामले पर जब भाजपाई, कांग्रेस पार्टी को घेर रहे थे तो पूर्व स्पीकर और बेरी विधायक डाक्टर रघुबीर सिंह कादियान ने स्पीकर हरविन्द्र कल्याण पर विपक्ष की आवाज को दबाने के इल्जाम लगाए दिए. इस पर भड़के कल्याण ने दो-टूक कहा, मैं चेयर के प्रति इस तरह की टिप्प्णी सहन नहीं करूंगा. बोलाचिकित्सक साहब आपको गवर्नर अभिभाषण पर 51 मिनट के लिए बुलवाया गया. यह मुद्दा जैसे-तैसे करके शांत हुआ लेकिन इस घटनाक्रम पर सदन में गतिरोध बना रहा.

स्पीकर वेल तक पहुंचे, फिर वॉकआउट

विज की टिप्प्णी के बाद कांग्रेसियों ने सदन में नारेबाजी प्रारम्भ कर दी. कांग्रेस पार्टी के कई विधायक स्पीकर वेल तक पहुंच गए. सदन में हंगामा देख स्पीकर ने कांग्रेसियों को चेतावनी देते हुए बोला कि वे अपनी सीट पर बैठें या फिर जो निर्णय करना है करें. वे सदन का माहौल किसी मूल्य पर नहीं बिगड़ने देंगे. कादियान ने जब विज पर पलटवार में उनके लिए भी उसी शब्द का इस्तेमाल कर दिया, जिसका विज ने हुड्डा के लिए किया था तो फिर से गरमा-गरमी प्रारम्भ हो गई. स्पीकर की चेतावनी के बीच कांग्रेसियों ने सदन से वॉकआउट किया.

मेरे पिता भी गए थे पर्ची लेकर

चरखी दादरी से बीजेपी विधायक सुनील सतपाल सांगवान ने इस भर्ती को लेकर ओमप्रकाश यादव के आरोपों को ठीक बताते हुए बोला – मेरे पिताजी (स्व सतपाल सांगवान) उस समय कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट के साथ हुआ करते थे. हमारे हलके के एक गरीब परिवार के बेटे का रोल नंबर लेकर मेरे पिताजी भी गए थे. उन्हें बोला गया यदि आपका कोई भाई-भतीजा है तो पर्ची दे दो, नहीं तो रहने दो. सुनील ने बोला – हमारा कोई भाई-भतीजा नहीं था. लेकिन उस समय उस गरीब परिवार के बच्चे का भी चयन नहीं हुआ. सुनील सांगवान ने इल्जाम एक पूर्व विधायक के भतीजे सहित कई नेताओं के संबंधियों का चयन करने के इल्जाम लगाए.

यह था पूरा मामला

हुड्डा गवर्नमेंट में हुई इस भर्ती के लिए करनाल के रहने वाले अमित कुमार ने भी आवेदन किया था. अमित और कुछ अन्य भर्ती को लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय पहुंचे थे. इंस्पेक्टर के 20 पदों में से 9 सामान्य वर्ग के लिए थे.

हाई न्यायालय में दाखिल की गई याचिका में इल्जाम लगाया किया कि इन पदों पर पूर्व की गवर्नमेंट के मंत्रियों, नेताओं और ऑफिसरों के संबंधियों को नियुक्त किया गया. अमित कुमार ने याचिका में बोला था कि उसने 200 नंबरों की लिखित परीक्षा में 145 अंक प्राप्त किए थे. वह टॉपर था, लेकिन उसे वेटिंग लिस्ट में रखा गया. साक्षात्कार में उसे 25 में से महज 7 नंबर दिए गए. कम अंक वालों को साक्षात्कार में अच्छे नंबर देकर चयन कर दिया गया.

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