हरियाणा सरकार ने गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों के विरूद्ध कार्रवाई की शुरू
Haryana News : हरियाणा गवर्नमेंट ने एक तरफ जहां गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों के विरूद्ध कार्रवाई प्रारम्भ कर दी है वहीं निजी विद्यालयों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए सभी जिला शिक्षा ऑफिसरों को कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं.
राज्य गवर्नमेंट ने निजी विद्यालयों को एडवाइजरी जारी करके बोला है कि वह अभिभावकों पर प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबें खरीदने का दबाव न बनाएं. इसके अतिरिक्त क्लासवाइज विद्यालय बैग के वजन के नियम को कठोरता से फॉलो करें. वहीं हर वर्ष यूनिफॉर्म न बदलने समेत छह निर्देश दिए गए हैं.
शिक्षा निदेशालय की तरफ से प्रदेश के सभी जिला शिक्षा ऑफिसरों को इस संबंध में पत्र जारी करके निजी विद्यालयों को गाइडलाइन से अवगत करवाने के लिए बोला गया है. विद्यालय यदि नियमों का पालन नहीं करते तो माता-पिता इस बारे में कम्पलेन दर्ज करा सकते हैं.
इसके लिए सभी जिला शिक्षा ऑफिसरों को ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर जारी करने को बोला गया है. इसके अतिरिक्त ऑफिसरों को स्वयं भी सरप्राइज चेकिंग कर नियमों के उल्लंघन की जांच करने के लिए बोला गया है.
सरकार द्वारा जारी निर्देशों में बोला गया है कि विद्यालयों को सिर्फ़ एनसीईआरटी या सीबीएसई से मान्यता प्राप्त पुस्तकों को ही जरूरी बनाना चाहिए. विद्यालय ऐसी पुस्तकें रोकें, जो न तो महत्वपूर्ण हैं और न ही नीति के अनुरूप हैं. विभाग ने विद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि यूनिफॉर्म में हर साल परिवर्तन न किया जाए. इसके अलावा, उन्हें अधिकृत विक्रेताओं से ही ड्रेस खरीदने के लिए विवश न किया जाए.
हर बार विद्यालय कुछ पुस्तकों में हल्की परिवर्तन कर देता है. इससे पेरेंट्स नए सिरे से सिलेबस खरीदने के लिए विवश होते है. इसे देखते हुए आदेश में बोला गया है कि विद्यार्थियों को पुरानी किताबें इस्तेमाल करने से हतोत्साहित नहीं करना चाहिए. पुराने पुस्तकों का इस्तेमाल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी फायदेमंद है.
विभाग ने बोला है कि कुछ विद्यालयों में विद्यार्थियों को सिर्फ़ अपनी बोतल से पानी पीने के लिए विवश किया जा रहा है. जबकि, नियम के मुताबिक हर विद्यालय में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता जरूरी है. बच्चों को विद्यालय के अंदर पानी पीने से वंचित रखना नियमों के विरुद्ध है.
ऐसा करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी. निजी विद्यालय छोटे-छोटे बच्चों पर भारी भरकम बैग लाद देते हैं. बचपन के लिहाज से यह उनकी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेय है. विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि विद्यार्थी निर्धारित सीमा से अधिक वजन के बैग न उठाएं.

