हाई कोर्ट ने चंदा कोचर की याचिका को कर लिया स्वीकार
मुंबई: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने वीडियोकॉन समूह की कुछ कंपनियों को दिए गए ऋणों में कथित अनियमितताओं के संबंध में CBI की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली आईसीएसआईसीआई बैंक की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी और व्यवस्था निदेशक (एमडी) चंदा कोचर की याचिका को स्वीकार कर लिया है।

श्रीमती। अनुजा प्रभुदेसाई और न्या। बोरकर की पीठ ने 9 जनवरी 2023 को पहले के आदेश को बरकरार रखा। आदेश में कोचर को अंतरिम जमानत दी गई और गिरफ्तारी को गैरकानूनी कहा गया।
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व व्यवस्था निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को जमानत दे दी है, जिन्हें वीडियोकॉन समूह को कर्ज के दुरुपयोग के इल्जाम में CBI ने अरैस्ट किया था, उन्होंने बोला कि उनकी गिरफ्तारी गैरकानूनी थी। ।
उस समय पीठ ने बोला था कि तथ्यों को देखते हुए याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। अदालत ने यह भी बोला कि क्राइम कबूल करने से मना करने को जांच में असहयोग नहीं बोला जा सकता।
वीडियोकॉन-आईसीआईसीआई बैंक कर्ज मुद्दे में CBI ने 25 दिसंबर को कोचर को अरैस्ट किया था। कोचर ने अंतरिम राहत मांगी है क्योंकि इसी महीने उनके बेटे की सगाई हुई है। हालांकि, पिछली सुनवाई में न्यायालय ने बोला था कि हम इस तथ्य पर विचार नहीं कर रहे हैं कि याचिकाकर्ता का बेटा शादीशुदा है और हम मुद्दे की योग्यता पर भी विचार नहीं कर रहे हैं। हम सिर्फ़ यह जांच कर रहे हैं कि गिरफ्तारी गैरकानूनी है या नहीं।’
सुनवाई के दौरान चंदा कोचर के वकील ने बोला कि CBI की कार्रवाई मनमानी और गैरकानूनी थी क्योंकि गिरफ्तारी दंड संहिता की धारा 46 (ए) का अनुपालन किए बिना की गई थी। गिरफ्तारी के समय कोई स्त्री पुलिस अधिकारी उपस्थित नहीं थी। चंदा के अरेस्ट मेमो में किसी स्त्री पुलिस अधिकारी का नाम नहीं था।
सीबीआई ने तर्क दिया कि वैसे यह एक सफेदपोश क्राइम था, इसलिए उसे हथकड़ी नहीं लगाई गई थी और न ही उसे छुआ गया था। चंदा के वकील ने उत्तर दिया कि गिरफ्तारी छूकर की गई है।
सीबीआई ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए बोला कि उनकी जांच जरूरी चरण में है और जल्द ही इल्जाम पत्र दाखिल किया जा सकता है। कोचर ने तर्क दिया कि प्रवर्तन निदेशालय का मुद्दा भी CBI के मामले पर है और प्रवर्तन निदेशालय ने कभी चंदा को अरैस्ट नहीं किया और दीपक को भी जमानत दे दी गई। दोनों ने प्रवर्तन निदेशालय की तरह ही CBI का भी योगदान किया।

