6 राज्यों में हैं 230 सीटें, पर कांग्रेस के हाथ आएंगी कितनीं…
दिल्ली में INDIA अलायंस की मंगलवार को मीटिंग हुई थी और यह सहमति बनी थी कि इसी महीने के आखिर तक सीट शेयरिंग पर सहमति बना ली जाएगी। लेकिन अगले ही दिन पंजाब में इसके उलट अलगाव की स्थिति बनती दिख रही है। यहां सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी का बोलना है कि वह सभी 13 सीटों पर अकेले ही लड़ेगी। कुछ दिन पहले ही अरविंद केजरीवाल ने भी जनता से अपील की थी कि वह आप को पंजाब की सभी 13 सीटें जिताए। अब AAP के अन्य नेता भी ऐसी ही बात कर रहे हैं। भले ही यह फाइनल नहीं है, लेकिन ‘आप’ के इस रुख को कांग्रेस पार्टी पर दबाव की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

अहम बात यह है कि कांग्रेस पार्टी भी यहां समझौते के मूड में नहीं है बल्कि वह भी सभी सीटों पर दावेदारी कर रही है। पंजाब कांग्रेस पार्टी चीफ अमरिंदर राजा वड़िंग ने बोला कि पार्टी सभी 13 सीटों पर अपने कैंडिडेट उतारेगी। उन्होंने बोला कि हमारी तो यही दावेदारी है, लेकिन अंतिम निर्णय तो हाईकमान को ही करना है। अमरिंदर ने बोला कि मुझे आशा है कि कोई निर्णय लेने से पहले हमसे भी राय दी जाएगी। बता दें कि आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल अभी 10 दिनों के लिए पंजाब के होशियारपुर में विपश्यना के लिए निकले हैं।
6 राज्यों में हैं 230 सीटें, पर कांग्रेस पार्टी के हाथ आएंगी कितनीं
इस दौरान अरविंद केजरीवाल सियासी गतिविधियों से दूर रहेंगे। INDIA अलायंस के लिए सीट शेयरिंग एक गंभीर समस्या बना हुआ है। बंगाल में ममता बनर्जी तीन से अधिक सीटें कांग्रेस पार्टी को देने के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं बिहार में भी लगभग इतनी ही सीटें महागठबंधन में उसे मिलने की आसार है। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के भी तेवर कठोर हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बंगाल से पंजाब तक कांग्रेस पार्टी के हाथ लड़ने के लिए कितनी लोकसभा सीटें आती हैं। दरअसल बंगाल, बिहार, यूपी, दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र में लोकसभा की कुल 230 सीटें आती हैं। ऐसे में इन राज्यों में यदि कांग्रेस पार्टी का शेयर कम रहा तो फिर उसके लिए चुनाव बाद की स्थितियां मुश्किल होंगी।
उत्तर में सिर्फ एक राज्य में सरकार, साउथ पर कांग्रेस पार्टी को अधिक भरोसा
फिलहाल उत्तर हिंदुस्तान में कांग्रेस पार्टी 4 राज्यसभा सीटों वाले हिमाचल में ही सत्ता में है। इसके अतिरिक्त उसकी गवर्नमेंट दक्षिण हिंदुस्तान के कर्नाटक और तेलंगाना में ही है। ऐसे में उसकी उम्मीदें भी उत्तर के मुकाबले साउथ इण्डिया से ही अधिक हैं। तमिलनाडु में वह साथी डीएमके पर निर्भर है, लेकिन केरल में उसकी अच्छी स्थिति है। हालांकि आंध्र प्रदेश में भी उसकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।

