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मैं मुकेश को पाकर बहुत भाग्यशाली हूं : नीता अंबानी

‘आज लड़कियों को यह समझना होगा कि वे लड़कों के बराबर हैं. मैंने अपने घर में कभी भी तीनों बच्चों आकाश, अनंत और ईशा के बीच कभी भेदभाव नहीं किया. रिलायंस में तीनों को बराबर की हिस्सेदारी दी.’ यह बोलना है एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी का. हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने स्त्री सश्कतिकरण पर अपनी बात रखी. नीता ने पारिवारिक जीवन में खुलकर बात की, जिसमें पति मुकेश के साथ संबंध भी शामिल थे.

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मुकेश को पाकर बहुत भाग्यशाली 

नीता ने इंटरव्यू में आगे बोला कि हमने एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखा है. मैं हमेशा कहती हूं, मुकेश अपने समय से बहुत आगे की सोचते हैं. इसे स्पॉटलाइट कह सकते हैं. मैं हमेशा बच्चों से कहती हूं कि मेरा सबसे जरूरी फैसला ठीक जीवन साथी चुनना था. मैं मुकेश को पाकर बहुत भाग्यशाली हूं. मुकेश मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं. मेरे जीवन साथी हैं. हमने जीवन के हर चरण का आनंद लिया है. हमने अपने बच्चों को पाला है अब हम अपने पोते-पोतियों का पालन पोषण कर रहे हैं.

मुझे सड़क वाली भेल बहुत पसंद है

उन्होंने आगे बोला कि हम भी वही करते हैं, जो आम दंपती करते हैं. वह मुझे ड्राइव पर ले जाते हैं. हम हिंदी संगीत सुनते हैं. हम दोनों को स्ट्रीट फूड बहुत पसंद है. मुझे सड़क वाली भेल पसंद है और उन्हें इडली-डोसा. हम अब भी वहीं करते हैं, जो पहले करते थे. हम बड़ों का सम्मान करते हैं. निष्ठावान हैं. विनम्र हैं. मुझे लगता है कि हम में बहुत कुछ नहीं बदला है.

बेटी को बेटों के बराबर अधिकार दिए

नीता ने कहा कि हम दोनों ने कभी भी बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं किया. मैंने हमेशा तीनों बच्चों को एक समान माना है. मुझे लगता है, जो काम लड़के कर सकते हैं, वह लड़कियां भी कर सकती है. यही मुकेश का भी मानना है और यह उत्तराधिकारी बनाते समय दुनिया ने देखा है. ईशा की विवाह परिमल परिवार में हुई है बावजूद इसके उन्हें अपने भाइयों के साथ बराबर हिस्सेदारी मिली है. आकाश, अनंत और ईशा के साथ-साथ पूरी युवा पीढ़ी हिंदुस्तान का नतेृत्व करने वाली हैं.

हमेशा उन्हें अच्छा आदमी बनाने के लिए प्रेरित करती हूं

नीता ने बोला कि मेरे तीनों बच्चों में भिन्न-भिन्न गुण हैं. अनंत सबसे छोटे हैं, वे बहुत दयालु हैं. आकाश जियो के माध्यम से डिजिटल क्रांति कर रहे हैं. ईशा रिलायंस फाउंडेशन में एक्टिव हैं और रिटेल का नेतृत्व कर रही हैं. मैं हमेशा अपने बच्चों से कहती हूं कि वह अपने ताकत पर ध्यान दें. स्वयं को मजबूत बनाएं. कोई भी आदमी पूरा नहीं होता. गलतियों पर ध्यान दें. मैं उन्हें समझाती हूं कि सफलताओं से अधिक गलतियों से सीखना चाहिए. मैं उन्हें कहती हूं कि हमेशा विनम्र रहो, दयालु रहो. लोगों का सम्मान करो.

 

 

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