राष्ट्रीय

हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में इन मुद्दों पर सदस्यों के बीच छिड़ी तीखी चर्चा और मतभेद

हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन आज प्रश्नकाल में गुड़गांव नहर में जल प्रदूषण और मेवात में बूचड़खानों को “लापरवाही से” लाइसेंस दिए जाने का मामला छाया रहा. सीएम नायब सिंह सैनी ने बोला कि यमुना की बदहाली दिल्ली की विपक्षी गवर्नमेंट की देन है. उन्होंने सदन को बताया, “उनके कार्यकाल में यमुना की हालत बहुत खराब हो गई थी. नदी की सफाई और पुनरुद्धार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए.

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हरियाणा को भाखड़ा जल आपूर्ति

प्रस्तावित दैनिक माँग (खरीफ 2025): 0.0204 एमएएफ (10,300 क्यूसेक)

औसत दैनिक प्राप्ति: हरियाणा के निर्दिष्ट संपर्क बिंदुओं पर 8,647 क्यूसेक

स्रोत: भाखड़ा मेन लाइन (बीएमएल) – आरडी 390000

नरवाना शाखा – आरडी 160000

प्रक्रिया: पंजाब के माध्यम से बीबीएमबी को मांग पत्र प्रस्तुत किए गए

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी ने इस मुद्दे में हस्तक्षेप किया है. उन्होंने कहा, “उनके निर्देश पर, हाल ही में दिल्ली में एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और मैं शामिल हुए थे. यमुना की सफाई के लिए अब एक संयुक्त समिति का गठन किया गया है.

प्रगति का दावा करते हुए, सैनी ने कहा, “पिछले चार महीनों में, यमुना से 16,000 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया है. यमुना अब और अधिक स्वच्छ हो रही है, और यह हरियाणा गवर्नमेंट के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है.

पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नदी की सफ़ाई एक ज़िम्मेदारी भी है और प्रतिबद्धता भी. उन्होंने कहा, “यमुना को स्वच्छ बनाने के पीएम मोदी के संकल्प को पूरा करना हमारा कर्तव्य है. ग्यारह ऐसे स्थानों की पहचान की गई है जहाँ प्रदूषित पानी नदी में प्रवेश करता है और इन स्थानों पर एसटीपी स्थापित किए जाएँगे.

सिंह ने इलाज सुविधाओं के क्षेत्र में राज्य की प्रगति की भी जानकारी दी. उन्होंने कहा, “2014 से पहले, हरियाणा में 25 एसटीपी और 7 कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) थे. पिछले 10 सालों में, हमने 65 नए एसटीपी और 10 नए सीटीपी स्थापित किए हैं. 8 और एसटीपी और 8 सीटीपी निर्माणाधीन हैं.

कांग्रेस विधायक आफ़ताब अहमद, जिन्होंने प्रदूषण का मामला उठाया, ने तर्क दिया कि यमुना नहर से गुड़गांव नहर में बहने वाला प्रदूषित पानी नूंह, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम ज़िलों को प्रभावित कर रहा है. उन्होंने कहा, “प्रदूषण की जाँच के लिए एक समिति बनाई गई थी, लेकिन कोई निर्णायक रिज़ल्ट नहीं निकला. उपजाऊ ज़मीन भी बंजर होती जा रही है.

मेवात में बूचड़खानों के लाइसेंस पर विधायक मामन खान के एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए, पर्यावरण मंत्री ने साफ किया कि इन्हें एक उद्योग माना जाता है. सिंह ने कहा, “अगर शर्तें पूरी होती हैं तो हम किसी पक्ष को लाइसेंस देने से कैसे इनकार कर सकते हैं? एनओसी जारी करते समय केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के नियमों का पालन किया जा रहा है.

उन्होंने बोला कि शिकायतें मिलने के बाद निरीक्षण किए गए. उन्होंने कहा, “शिकायतें मिलने के बाद सरपंच, एसडीएम, बीडीपीओ और पशु डॉक्टर की एक टीम ने गाँवों का दौरा किया और कमियों के लिए जुर्माना लगाया गया.” सिंह ने कहा कि 2014 से अब तक मेवात में 28 बूचड़खानों को एनओसी दी जा चुकी है, जबकि 7 आवेदन अभी भी प्रक्रियाधीन हैं.

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