राष्ट्रीय

मालदीव के मोहम्मद रैशन को भारत ने दिया दूसरी बार जन्म

23 Year old Maldivian Cured In India: मालदीव से हिंदुस्तान के केरल राज्य में पोस्टीरियर स्किलियोसिस करेक्शन सर्जरी (Posterior Scoliosis Correction Surgery) कराने आए पुरुष मोहम्मद रैशन अहमद (Mohamad Raishan Ahmed) को नयी जीवन मिल गई, इससे पहले वो पैदाइश से ही बेड रिडेन थे, लेकिन अब वो बिना किसी सहारे के बैठ सकता है सफल उपचार के बाद अब वो आगे की पढ़ाई करना चाहता है

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क्या है मोहम्मद रैशन अहमद की कहानी?

मालदीव के 23 वर्ष के पेशेंट मोहम्मद रैशन अहमद (Mohamad Raishan Ahmed), जो अहमद मुहम्मद (Ahmed Muhamad) और अमीनाथ इब्राहिम (Aminath Ibrahim) के बेटे हैं उनका जन्म स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy) टाइप 2 के साथ हुआ था, जो एक हेरिडिटरी जेनेटिक कंडीशन है, जिसमें पूरे शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं क्योंकि रीढ़ की हड्डी और ब्रेनस्टेम में नर्व सेल्स ठीक से काम नहीं करते हैं हर 6,000 में से एक बच्चा एसएमए (SMA)के साथ पैदा होता है और ये जन्म के समय मृत्यु का एक बड़ा कारण भी है

कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी पेशेंट मोहम्मद रैशन अहमद को परेशान कर रही थीं, जिससे वो अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने से सीमित हो गया था इनमें से एक परेशानी स्किलियोसिस (Scoliosis) थी जो 8 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लगातार खराब होती जा रही थी वो अपनी पूरी जीवन बिस्तर पर पड़ा रहा और उसके केवल दोनों हाथ काम करते थे और उसके जीवन का एक ही लक्ष्य था बिना गिरे बैठना लड़के का मानसिक विकास बहुत अच्छा था और वो एक्टिव रूप से अपनी पढ़ाई कर रहा था और अब उसने पीएचडी करने का मन भी बना लिया

भारत की तरफ उम्मीदों भरा कदम

बिना गिरे बैठने के मकसद ने उन्हें हिंदुस्तान में तिरुवनंतपुरम के किमहेल्थ हॉस्पिटल ले आया जहां उनकी मुलाकात ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जन डाक्टर रंजित उन्नीकृष्णन (Dr. Ranjith Unnikrishnan) से हुई पेशेंट की खोपड़ी से कूल्हों तक स्क्रू और रॉड लगाकर एक पोस्टीरियर स्किलियोसिस करेक्शन सर्जरी की गई तकरीबन 14 घंटे तक चलने वाली यह सर्जरी बहुत चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरी थी, क्योंकि बीमार की कई स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखा गया था सर्जरी के बाद बीमार को फिजियोथेरेपी करानी पड़ी और बिना गिरे सीधे बैठने की उसकी जीवन भर ख़्वाहिश पूरी हो गई अब उसकी रीढ़ की हड्डियां ‘मजबूत और सीधी’ है ये राष्ट्र में अपनी तरह की पहली सफल सर्जरीज में से एक है

डॉक्टर ने क्या कहा?

डॉ रंजित उन्नीकृष्णन ने कहा, “कई वर्षों से वो अपने अंगों को नहीं हिला पा रहा था ये लार्ज स्किलियोसिस सालों से बढ़ रही थी, इसने उसे बिना सहारे सीधे बैठने नहीं दिया इसलिए उसने बेल्ट, ब्रीज़ जैसे नॉर्मल नॉन-सर्जिकल तरीकों की प्रयास की वो अपनी कमजोर मांसपेशियों के कंट्रोल के कारण अपनी गर्दन नहीं थाम सकता था आखिरकार, सर्जरी वो विकल्प थी जिस पर हमने चर्चा की लेकिन इस ट्रीटमेंट में उसकी फिटनेस से लेकर कई चुनौतियां थीं हमें उसे उसके सिर से लेकर उसके कूल्हे तक उपचार करना पड़ा क्योंकि वह सीधे खड़ा भी नहीं हो सकता था कई चर्चाओं के बाद, उसने सर्जरी कराने का निर्णय किया तो अगस्त के महीने में, हमने पोस्टीरियर स्किलियोसिस करेक्शन सर्जरी की

डॉ उन्नीकृष्णन ने ये भी कहा कि ये सर्जरी तकरीबन 14 से 15 घंटे तक चली जिसका सामना पेशेंट ने बड़ी बहादुरी से किया, उन्होंने कहा, “हम इसे बहुत सफलता के साथ कर सकते थे और हमने पूरी सर्जरी को एक स्टेज में करने की सख्त योजना बनाई क्योंकि वो अधिक एनेस्थेसिया हैंडल नहीं कर सकता था ऑपरेशन के बाद वो कुछ दिनों तक वेंटिलेटर पर रहा उसने वो हासिल कर लिया है जो वह चाहता था वो बिना सहारे सीधे बैठने में सक्षम है वो पहले से ही ग्रैजुएच है वो अपनी मास्टर की पढ़ाई करने का प्लान बना रहा है

पेशेंट का बढ़ गया कॉन्फिडेंस

मालदीव के पेशेंट मोहम्मद रैशन अहमद ने कहा कि उसका कॉन्फिडेंस बढ़ गया है, उन्होंने कहा, “सर्जरी के तकरीबन एक महीने बाद दोनों कंधों में थोड़ा दर्द था हालांकि, फिजियोथेरेपिस्ट और एक्यूट थेरेपिस्ट के कारण दर्द बहुत कम हो गया है.मैं बिना किसी सहारे बैठ सकता हूं मैं फ्रीली अपने दम पर बैठ रहा हूं मैं अपना संतुलन बनाए रखने में सक्षम हूं मैं अपने अंगों को फ्रीली हिलाने में सक्षम हूं डाक्टर रंजित की टीम का शुक्रिया सर्जरी के बाद, मैं अपनी गर्दन को स्वतंत्र रूप से ऊपर और नीचे हिला पा रहा हूं

मोहम्मद रैशन फिलहाल अपने वतन मालदीव में यूनिसेफ (UNICEF) के एक प्रोजेक्ट में शामिल है, उन्होंने कहा, “इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के बाद मैं अपनी आगे की एजुकेशन, मास्टर एजुकेशन के लिए पूरी प्रयास करूंगा मैं परफॉर्मेंस साइकोलॉजी के लिए ट्राई कर रहा हूं जो यूके (UK) में मौजूद है इस रिकवरी प्रोसेस के बाद, मैं यूनिसेफ प्रोजेक्ट के साथ आगे बढ़ूंगा और उसके बाद मास्टर की डिग्री करूंगा,

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