राष्ट्रीय

भारत ने पाकिस्तान की चीन निर्मित वायु रक्षा प्रणाली पर प्रहार करने के बाद शुरू किया था धमाका

रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बोला कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने हिंदुस्तान की रक्षा शक्ति और तकनीकी ताकत में हुई जबरदस्त वृद्धि को प्रदर्शित किया, क्योंकि सेना ने सीमा पार किए बिना ही पाक में आतंकी ठिकानों पर परफेक्ट हमले किए और उन्हें नष्ट कर दिया. मंत्रालय ने बोला कि अभियान में भारतीय प्रणालियों के शत्रु की प्रौद्योगिकियों को नष्ट करने के ठोस सबूत भी मिले, जिनमें चीनी मूल की पीएल-15 मिसाइल और तुर्किये के ‘यीहा’ नाम के मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) के टुकड़े शामिल हैं.
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इसके अतिरिक्त हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बोला कि भारतीय वायुसेना ने पाक द्वारा हिंदुस्तान के साथ अपनी सीमा और नियंत्रण रेखा पर लगाए गए चीनी वायु रक्षा प्रणालियों को सफलतापूर्वक जाम कर दिया है. एक अन्य जरूरी खुलासे में हिंदुस्तान ने बोला कि उसने 23 मिनट से कम समय में अपने मिशन को अंजाम दिया, जो आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले राष्ट्र पर हिंदुस्तान की रक्षा श्रेष्ठता को दर्शाता है. गवर्नमेंट द्वारा जारी एक बयान में ऑपरेशन सिंदूर के परिचालन विवरण पर करीब से नज़र डाली गई – जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में पाक से जुड़े आतंकी हमले के लिए हिंदुस्तान की प्रतिक्रिया, जिसमें धार्मिक रूप से प्रेरित हमले में 26 नागरिक, सभी पर्यटक मारे गए थे.
सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में बोला गया है कि हवाई धावा असममित युद्ध के हालिया पैटर्न के लिए हिंदुस्तान की परफेक्ट सैन्य प्रतिक्रिया थी, जिसमें 22 अप्रैल को दक्षिणी कश्मीर के पहलगाम में 26 नागरिकों की जघन्य हत्याओं का जिक्र किया गया था, जिनमें से अधिकतर पर्यटक थे. विचाराधीन वायु रक्षा बैटरी में लाहौर के पास तैनात पाकिस्तानी सेना की चीन द्वारा आपूर्ति की गई HQ-9 वायु रक्षा प्रणाली शामिल थी. सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में बोला गया है कि 8 मई की सुबह की छापेमारी के दौरान साइट को बेअसर कर दिया गया था. इसमें आगे बोला गया है कि जामिंग इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरणों के साथ की गई थी और रडार प्रतिष्ठानों और मिसाइल बुनियादी ढांचे को निष्क्रिय करने और नष्ट करने के लिए घूमने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया गया था.
‘चीन निर्मित वायु रक्षा प्रणाली को जाम करना’
इस बात की व्याख्या करते हुए कि ऑपरेशन के दौरान हिंदुस्तान के ड्रोन और मिसाइलें इतनी सफल कैसे रहीं और यह भी उल्लेख करते हुए कि पाक की वायु रक्षा प्रणाली उन्हें पकड़ने में बुरी तरह विफल क्यों रही, बयान में खुलासा किया गया कि भारतीय वायु सेना उनकी सुरक्षा प्रणाली को दरकिनार करने और चीन निर्मित रक्षा उपकरणों को जाम करने में सफल रही.
इन प्रणालियों के बंद होने के बाद, हिंदुस्तान 23 मिनट के भीतर अपने मिशन को अंजाम देने में सफल रहा, जिससे इस क्षेत्र में नयी दिल्ली की तकनीकी बढ़त का पता चलता है. बयान में बोला गया है, “भारतीय वायु सेना ने पाक की चीन द्वारा आपूर्ति की गई वायु रक्षा प्रणालियों को दरकिनार कर दिया और उन्हें जाम कर दिया, मिशन को सिर्फ़ 23 मिनट में पूरा किया, जिससे हिंदुस्तान की तकनीकी बढ़त का पता चलता है.
इस बीच, बयान में उल्लेख किया गया है कि भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली 100 फीसदी ‘मेड इन इंडिया’ वायु रक्षा प्रणाली ने असाधारण प्रदर्शन किया. इसमें बोला गया है, “ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय प्रणालियों द्वारा शत्रुतापूर्ण प्रौद्योगिकियों को बेअसर करने के ठोस सबूत पेश किए हैं,” इसमें उल्लेख किया गया है कि कैसे चीनी निर्मित पीएल-15 मिसाइलें, तुर्की निर्मित यूएवी जिन्हें ‘यिहा’ या ‘येहाव’ बोला जाता है, साथ ही लंबी दूरी के रॉकेट, क्वाडकॉप्टर और पाक द्वारा भेजे गए वाणिज्यिक ड्रोन सभी को भारतीय वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा रोका गया और नष्ट कर दिया गया.
साक्ष्यों के साथ इसका समर्थन करने के लिए, हिंदुस्तान ने इन प्रक्षेपास्त्रों के मलबे से बरामद और पहचाने गए भागों और टुकड़ों को प्रदर्शित किया है. बयान में बोला गया है, “यह दर्शाता है कि पाक द्वारा विदेशों से आपूर्ति किए गए उन्नत हथियारों का दोहन करने के प्रयासों के बावजूद, हिंदुस्तान के स्वदेशी वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध नेटवर्क बेहतर बने रहे.
मंत्रालय ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर असंयमित युद्ध के उभरते स्वरूप के विरुद्ध एक सुनियोजित सैन्य प्रतिक्रिया के रूप में उभरा, जिसमें सैन्य कर्मियों के साथ-साथ निहत्थे नागरिकों को भी निशाना बनाया जाता है.” उसने कहा, “अप्रैल में पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले ने इस परिवर्तन की ओर ध्यान आकर्षित किया. हिंदुस्तान की प्रतिक्रिया सुविचारित, परफेक्ट और रणनीतिक थी.” रक्षा मंत्रालय ने बोला कि सामरिक उत्कृष्टता के अतिरिक्त इस अभियान में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वदेशी तकनीकी प्रणालियों का बिना रुकावट एकीकरण भी देखने को मिला. उसने बोला कि चाहे ड्रोन युद्ध हो या स्तरीय वायु रक्षा या इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सैन्य अभियानों में तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में हिंदुस्तान की यात्रा में एक मील का पत्थर है. मंत्रालय ने बोला कि हिंदुस्तान के आक्रामक हमलों ने जरूरी पाकिस्तानी वायुसेना ठिकानों – नूर खान और रहीमयार खान को सर्जिकल सटीकता के साथ निशाना बनाया. रक्षा मंत्रालय ने बोला कि विध्वंसक असर के लिए ‘आत्मघाती ड्रोन’ सहित अन्य अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें से प्रत्येक ने शत्रु के राडार और मिसाइल प्रणालियों सहित उच्च-मूल्य वाले लक्ष्यों को चुन-चुनकर नष्ट कर दिया.
रक्षा मंत्रालय ने कहा, “पिछले दशक में लगातार सरकारी निवेश से विकसित ये प्रणालियां ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ताकत बढ़ाने वाली साबित हुईं.” उसने कहा, “इन प्रणालियों ने यह सुनिश्चित करने में अहम किरदार निभाई कि शत्रु के जवाबी हमलों के दौरान पूरे हिंदुस्तान में नागरिक और सैन्य बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर हानि न पहुंचे.” मंत्रालय ने बोला कि सभी हमले भारतीय हथियारों एवं प्रणालियों को किसी तरह के हानि के बिना किए गए, “जो हमारी निगरानी, ​​योजना और वितरण प्रणालियों की प्रभावशीलता को रेखांकित करता है.” रक्षा मंत्रालय ने बोला कि लंबी दूरी के ड्रोन से लेकर निर्देशित हथियारों तक आधुनिक स्वदेशी प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से ये हमले अत्यधिक कारगर और सियासी रूप से नपे-तुले बने.

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