भारत का defence export, 2014 की तुलना में बढ़ा 35 गुना
करीब सौ राष्ट्रों को हमारे राष्ट्र में बने डिफेंस प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं. हमारा यह लक्ष्य है कि इस वर्ष हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट तीस हज़ार करोड़ रुपये और वर्ष 2029 तक पचास हज़ार करोड़ रुपए पहुँच जाये. मुझे पूरा विश्वास है, हम यह लक्ष्य अवश्य प्राप्त करेंगे. आज हिंदुस्तान का defence export, 2014 की तुलना में, लगभग 35 गुना बढ़ चुका है. वर्ष 2013-14 में हिंदुस्तान से होने वाला डिफेंस एक्सपोर्ट सिर्फ़ 686 करोड़ का था वह आज 2024-25 में बढ़ कर 23,622 करोड़ तक पहुँच गया है:

पहले हम अपनी रक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह से विदेशों पर निर्भर थे, लेकिन आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूँ कि हिंदुस्तान डिफेंस के मुद्दे में बड़ी तेज़ी से Self-reliance की तरफ़ बढ़ रहा है और इतना ही नहीं हिंदुस्तान का डिफेंस एक्सपोर्ट्स भी बढ़ रहा है. पिछले ग्यारह सालों में राष्ट्र का डिफेंस बजट, जो 2013-14 में ₹2,53,346 करोड़ था, वह बढ़कर लगभग तीन गुना यानि 2024-25 में ₹6,21,940.85 करोड़ तक पहुँच गया है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद तो यह डिफेंस बजट और भी बढ़ने वाला है
जहां 2014 में हमारा domestic defence production लगभग 40 हजार करोड़ रूपये था, वहीं आज हमारा domestic defence production 1.50 लाख करोड़ रूपए के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर चुका है:
किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसकी सुरक्षा से सीधे जुड़ी होती है. यानी हमारा राष्ट्र प्रगति करे, इसके लिए जरूरी है कि हम हर ओर से सुरक्षित महसूस करें. पर यदि हमारी सुरक्षा स्वयं दूसरों के हाथ में हो, हम बाहर से imported defence equipments पर निर्भर हों, तो ऐसी सुरक्षा पर कहीं न कहीं सवालिया निशान लग जाता है. इसलिए हमारे लिए यह आवश्यक रहा है, कि हम अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं आगे आएँ और इस राष्ट्र में defence manufacturing capabilities को बनाने और बढ़ाने में इन्वेस्ट करें
आपको यह जानकर ख़ुशी होगी कि अभी कुछ दिन पहले हमने HAL को क़रीब 66,000 करोड़ रुपये की लागत से 97 तेजस फाइटर प्लेन्स बनाने का नया ऑर्डर दिया है. इसके पहले भी HAL को 48,000 करोड़ रुपए की लागत से 83 एयरक्राफ्ट बनाने का order दिया गया था:. Foreign Companies के equipments की जिस quality से हम प्रभावित होते हैं, वह quality एक दिन में नहीं बनी. उसमें भी बड़ा समय लगा और उन्हें अपने राष्ट्र का बराबर support मिला. हमारे HAL का ही उदाहरण लीजिए, इसने भी पहले दिन ही ‘तेजस’ का निर्माण नहीं कर लिया. पर हमारे समर्थन और हमारी Armed Forces के बढ़ते भरोसे ने HAL को ‘तेजस’ के निर्माण की ओर आगे बढ़ने की ऊर्जा प्रदान की.हमारा तेजस एयरक्राफ्ट हिंदुस्तान की indeginous डिफेंस कैपेबिलिटीज़ का बहुत बढ़िया उदाहरण बनने वाला है. ऐसा नहीं है कि हमें इस काम में समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ रहा है, मगर हमने यह तय किया है कि हम हर परेशानी का निवारण निकालेंगे और हिंदुस्तान में फाइटर एयरक्राफ्ट बनाने की पूरी कैपेबैलिटी अवश्य खड़ी करेंगे
आज हम Fifth Generation fighter aircraft बनाने की दिशा में भी आगे कदम बढ़ा चुके हैं. हम एयरक्राफ्ट का इंजन भी हिंदुस्तान में ही बनाने की तरफ़ बढ़ चुके हैं. हम लोग फ़्रेंच कंपनी Safaran के साथ इंजन मेकिंग का काम हिंदुस्तान में प्रारम्भ करने जा रहे हैं. हम private sector को एक suitable growth environment प्रदान कर रहे हैं. इसके अनुसार, हमने strategic partnership Model के माध्यम से fighters’ planes, helicopter, Tank और Submarines सहित Mega Defence Programme के निर्माण के अवसर खोले हैं, जो आने वाले सालों में हमारी private companies को Global Giants बनने में सहायता करेगें
हम यह अच्छी तरह समझते हैं, कि प्राइवेट सेक्टर में defence research और development को स्थापित करने में समय लगेगा. इस प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए, हमने DRDO के माध्यम से free of cost, ‘Transfer of Technology’ के अवसर खोले हैं. यह defence technology sector में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है
जब हम self-reliance यानि आत्मनिर्भरता की बात करते हैं तो हम केवल भारतीय कंपनियों की बात नहीं करते हैं. दुनिया की जितनी भी बड़ी बड़ी डिफेंस कंपनीज़ हैं उन सबके लिए आज मौक़ा है, हिंदुस्तान में invest करने का, यहाँ डिफेंस equipment के Coproduction का
मैं, हमारी universities के Vice chancellors, Deans और प्रोफेसर्स से यह बोलना चाहूँगा, कि हम क्या ऐसे structural changes कर सकते हैं, हम ऐसे क्या Incentives दे सकते हैं, कि पूरे विश्व में फैला हुआ, हमारा Indian talent, हमारे पास, हमारे लिए काम करने आए. क्या हम ऐसी कोई प्रबंध कर सकते हैं, कि हमारा Indian talent, जो बाहर के राष्ट्रों में काम कर रहा है, यदि उसे वहां कोई परेशानी हो, तो वह किसी और दूसरे राष्ट्र में, या दूसरी कंपनी में जाने की बजाय, हमारे राष्ट्र में आए. उससे हमारे research and development तथा innovation ecosystem को जो sudden boost मिलेगा, वह कहीं न कहीं, हमें और भी अधिक ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा

