राष्ट्रीय

अयोध्या फैसले के खिलाफ खड़े हुए जिन जस्टिस नरीमन

देश पर सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली पार्टी कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद (NHRC) के अध्यक्ष की नियुक्ति पर विरोध जताई है और बोला है कि समिति द्वारा अपनाई गई चयन प्रक्रिया में बुनियादी रूप से खामियां हैं. गौरतलब है कि, NHRC के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन के लिए चयन समिति की बैठक 18 दिसंबर को हुई. बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हुए.

Former supreme court judge rohinton fali nariman put questions on ayodhya ram mandir

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रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस पार्टी ने अपने असहमति नोट में समिति के साथ अपनी असहमति के कई कारण बताए. पार्टी  ने बोला कि, “सबसे पहले, समिति द्वारा अपनाई गई चयन प्रक्रिया में बुनियादी तौर पर खामियां थीं. यह एक पूर्व-निर्धारित अभ्यास था, जिसमें आपसी परामर्श और आम सहमति की स्थापित परंपरा को नजरअंदाज किया गया, जो ऐसे मामलों में जरूरी है. यह विचलन निष्पक्षता और निष्पक्षता के सिद्धांतों को कमजोर करता है, जो चयन समिति की विश्वसनीयता के लिए जरूरी हैं. विचार-विमर्श को बढ़ावा देने और सामूहिक फैसला सुनिश्चित करने के बजाय, समिति ने नामों को आखिरी रूप देने के लिए अपने संख्यात्मक बहुमत पर भरोसा किया, बैठक के दौरान उठाए गए वैध चिंताओं और दृष्टिकोणों की अनदेखी की.

कांग्रेस ने ये भी बोला कि NHRC एक जरूरी वैधानिक निकाय है, जिसका काम सभी नागरिकों, विशेष रूप से समाज के उत्पीड़ित और हाशिए पर पड़े वर्गों के मौलिक मानवाधिकारों की रक्षा करना है. पार्टी ने अपने नोट में बोला कि, “हमने योग्यता और समावेशिता की जरूरत दोनों को ध्यान में रखते हुए अध्यक्ष पद के लिए न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और न्यायमूर्ति कुट्टीयिल मैथ्यू जोसेफ के नामों का प्रस्ताव रखा. अल्पसंख्यक पारसी समुदाय के एक प्रतिष्ठित न्यायविद न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन अपनी बौद्धिक गहराई और कानूनी मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए मशहूर हैं. उनका शामिल होना हिंदुस्तान के बहुलवादी समाज का अगुवाई करने के लिए NHRC के सरेंडर के बारे में एक मजबूत संदेश भेजेगा. इसी तरह, अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय से संबंधित उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुट्टीयिल मैथ्यू जोसेफ ने लगातार ऐसे निर्णय दिए हैं जो पर्सनल स्वतंत्रता और हाशिए पर पड़े समूहों की सुरक्षा पर बल देते हैं, जो उन्हें इस जरूरी पद के लिए एक आदर्श उम्मीदवार बनाता है.

बता दें कि, कांग्रेस पार्टी ने जिन जस्टिस नरीमन को NHRC अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया है, ये वहीँ हैं, जिन्होंने कुछ दिन पहले अयोध्या मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर प्रश्न उठाते हुए हिन्दुओं को अत्याचारी और तानाशाह बोला था. जस्टिस नरीमन ने बोला था कि अयोध्या मुद्दे में उच्चतम न्यायालय का निर्णय गलत था और वो स्थान बाबरी मस्जिद की थी. उनके इस बयान पर जमकर बवाल मचा था, अब कांग्रेस पार्टी ने उन जस्टिस का समर्थन करते हुए उन्हें मानवाधिकार अध्यक्ष बनाने की मांग की है.

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