उपराष्ट्रपति धनखड़ के इस बयान पर कपिल सिब्बल के किया पलटवार
Kapil Sibal vs Jagdeep Dhankhar: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के बीच उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश पर तीखी बहस छिड़ गई है। जगदीप धनखड़ ने न्यायपालिका को “सुपर संसद” की किरदार निभाने से बचने की चेतावनी दी थी। जबकि सिब्बल ने उनके बयानों को “असंवैधानिक” बताते हुए पलटवार किया है। यह नया टकराव कानूनी सीमाओं और राष्ट्रीय भलाई की व्याख्याओं को लेकर बढ़ती तकरार की ओर इशारा कर रहा है।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय के आदेश पर अपनी टिप्पणियों की आलोचना करने वालों पर निशाना साधा। वहीं कपिल सिब्बल ने मंगलवार को बोला कि न्यायालय ने जो कुछ भी बोला है वह राष्ट्र के कानूनी मूल्यों के अनुरूप और राष्ट्रीय भलाई से प्रेरित है। धनखड़ ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय के उस आदेश की आलोचना की जिसमें राज्यपालों द्वारा राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए आरक्षित विधेयकों पर फैसला लेने के लिए तीन महीने की समयसीमा निर्धारित की गई थी। उन्होंने बोला कि न्यायपालिका को कार्यपालिका के क्षेत्र में कब्ज़ा नहीं करना चाहिए।
सिब्बल ने क्या-क्या कहा?
इसके उत्तर में कपिल सिब्बल ने बोला कि उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए सभी फैसला “हमारे कानूनी मूल्यों के अनुरूप और राष्ट्रीय भलाई से प्रेरित” हैं। उन्होंने धनखड़ के बयानों को “राजनीतिक” करार दिया और बोला कि राज्यसभा अध्यक्ष को विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच समान दूरी बनाए रखनी चाहिए।
सिब्बल ने आगे बोला कि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा अध्यक्ष विपक्ष और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच समान दूरी बनाए रखते हैं और “पार्टी के प्रवक्ता” नहीं हो सकते। उन्होंने आगे कहा, “हर कोई जानता है कि लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी बीच में होती है। वह सदन के अध्यक्ष होते हैं किसी एक पार्टी के नहीं। वे भी वोट नहीं करते, सिर्फ़ टाई होने पर वोट करते हैं। ऊपरी सदन के साथ भी यही है। आप विपक्ष और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच समान दूरी पर होते हैं।”
सिब्बल ने बल देते हुए कहा, “आप जो कुछ भी कहते हैं वह समान दूरी पर होना चाहिए। कोई भी अध्यक्ष किसी पार्टी का प्रवक्ता नहीं हो सकता। मैं यह नहीं कहता कि वह (धनखड़) हैं। लेकिन सैद्धांतिक रूप में कोई भी अध्यक्ष किसी पार्टी का प्रवक्ता नहीं हो सकता। यदि ऐसा प्रतीत होता है तो कुर्सी की गरिमा कम हो जाती है।”

