कावेरी जल बंटवारे पर हुई सर्वदलीय बैठक, के अन्नामलाई ने कहा…
बैठक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, पूर्व सीएम और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा, जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या, लोकसभा सांसद सुमलता अंबरीश और कई अन्य नेता उपस्थित रहे.

कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट ने खराब बारिश के कारण जलाशय में पानी के कम प्रवाह के मद्देनजर कावेरी जल-बंटवारे मामले पर चर्चा के लिए बुधवार को एक सर्वदलीय बैठक की. कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने जल टकराव मामले पर चर्चा के लिए बेंगलुरु के विधान सौध में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, पूर्व सीएम और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा, जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या, लोकसभा सांसद सुमलता अंबरीश और कई अन्य नेता उपस्थित रहे.
तमिलनाडु में विरोध के स्वर
तमिलनाडु भाजपा प्रमुख के अन्नामलाई ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए बोला कि सिद्धारमैया गवर्नमेंट के आने के बाद दो राज्यों के बीच टकराव फिर से प्रारम्भ हो गया है. उन्होंने बोला कि पूरी परेशानी कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के बाद प्रारम्भ हुई… उन्होंने अल्पकालिक सियासी फायदा के लिए परेशानी पैदा की. कर्नाटक के डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बोला कि वह तमिलनाडु को एक बूंद पानी भी नहीं देंगे. इसलिए उन्होंने इसे और बढ़ा दिया.भाजपा नेता ने बोला कि कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट अल्पकालिक सियासी फायदा के लिए समस्याएं पैदा कर रही है. बीजेपी ने कर्नाटक की कांग्रेस पार्टी गवर्नमेंट पर तमिलनाडु को कानूनी तौर पर आवश्यकता से कम पानी छोड़ने का इल्जाम लगाया. तमिलनाडु में भगवा पार्टी ने इल्जाम लगाया कि कर्नाटक गवर्नमेंट उच्चतम न्यायालय के आदेश को लागू करने में देरी कर रही है.
कावेरी जल टकराव क्या है?
कावेरी जल टकराव कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी राज्यों के बीच एक लंबे समय से चला आ रहा मामला है. यह टकराव कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर है, जो दक्षिण हिंदुस्तान की एक प्रमुख नदी है. यह टकराव दशकों से चला आ रहा है और इसके चलते कई दौर की मुकदमेबाजी हुई है. 2018 में, हिंदुस्तान के सर्वोच्च कोर्ट ने कर्नाटक को तमिलनाडु को 192 टीएमसीएफटी पानी जारी करने का आदेश दिया. हालाँकि, कर्नाटक गवर्नमेंट आदेश का पालन करने में अनिच्छुक रही है. इससे दोनों राज्यों के बीच तनाव पैदा हो गया है. आशा यह है कि उच्चतम न्यायालय दोनों राज्यों को कावेरी जल टकराव के पारस्परिक सहमति वाले निवारण तक पहुंचने में सहायता कर सकेगा. यह इसमें शामिल सभी हितधारकों के सर्वोत्तम भलाई में होगा.

