जानें, सोनिया-राहुल संग के साथ शामिल सुंदर भंडारी का परिचय

कोर्ट ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी के साथ-साथ जिन अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है, उनके नाम प्रमुख तौर पर इस प्रकार से है-
- सोनिया गांधी
- राहुल गांधी
- सुमन दुबे
- सैम पित्रोदा
- मेसर्स यंग भारतीय कंपनी
- Ms Dotex merchandise Private limited
- सुनील भंडारी
इस मुकदमा के आरोपियों की लिस्ट में एक नाम का जिक्र न्यायालय ने किया है। मगर, नेशनल हेराल्ड मुकदमा में अन्य आरोपियों की तरह मीडिया में इनकी काफी कम ही चर्चा होती है। यदि आप गूगल भी करने जाएं तो सार्वजनिक रूप से इनकी बहुत ही कम जानकारी मिलती है। चलिए इनके बारे में जानते हैं और इनका नेशनल हेराल्ड मुकदमा में लिंक को जानते हैं।
National Herald Case: सुनील भंडारी कौन हैं और उनका रोल है?
सुनील भंडारी नेशनल हेराल्ड मुकदमा में एक आरोपी हैं। उनका नाम प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट में शामिल है। वह कोलकाता के एक प्रवाइवेट कंपनी डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने अप्रैल 2025 में दिल्ली की राउज एवेन्यू न्यायालय में दाखिल अपनी चार्जशीट में सुनील भंडारी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, यंग इण्डिया और डोटेक्स मर्चेंडाइज को आरोपी बनाया है।
सुनील भंडारी की भूमिका
सुनील भंडारी डोटेक्स मर्चेंडाइज के एक अधिकारी हैं। प्रवर्तन निदेशालय का इल्जाम है कि इस कंपनी ने नेशनल हेराल्ड मुद्दे में पैसों के हेरफेर में किरदार निभाई थी। जांच में दावा किया गया कि एजेएल-यंग इण्डिया नेटवर्क के जरिए 18 करोड़ रुपये की गैरकानूनी फंडिंग, 38 करोड़ रुपये की अग्रिम किराए की राशि और 29 करोड़ रुपये के विज्ञापनों से काला धन जमा किया गया था। सुनील भंडारी का नाम इस फाइनेंसियल लेनदेन से जोड़ा गया है। हालांकि, उनकी परफेक्ट किरदार अभी जांच के दायरे में है।
सुनील भंडारी का बैकग्राउंड
सुनील भंडारी के निजी जीवन या पेशेवर लाइफ की जानकारी सार्वजनिक नहीं है। बस इतनी जानकारी है कि वह डोटेक्स मर्चेंडाइज के एक अधिकारी हैं। इस मुद्दे में एक छोटी लेकिन अहम कड़ी मानी जा रही है। उनकी किरदार को लेकर जांच जारी है, और न्यायालय में अगली सुनवाई से और तथ्य सामने आ सकते हैं।
क्या है नेशनल हेराल्ड केस?
नेशनल हेराल्ड मुकदमा की आरंभ 2012 में हुई, जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया और राहुल गांधी पर इल्जाम लगाया कि उन्होंने यंग इण्डिया लिमिटेड के जरिए एजेएल की 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों को गलत ढंग से हासिल किया। स्वामी का दावा था कि यह सब हेराल्ड हाउस और अन्य संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए किया गया. प्रवर्तन निदेशालय ने 2021 में इस मुद्दे में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच प्रारम्भ की और अप्रैल 2025 में चार्जशीट दाखिल की

