जानें, कौन हैं ऑपरेशन सिंदूर में काबिले तारीफ प्रदर्शन करने वाले RAW चीफ पराग जैन…
Who is Parag Jain New RAW Chief: हिंदुस्तान की सबसे गुप्त और सबसे अहम खुफिया एजेंसी RAW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) को नया चीफ मिल गया है। नए चीफ की पहचान है जमीन से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने की महारत, ऑपरेशन सिंदूर जैसी बड़ी कार्रवाई में कामयाबी और विदेशी मोर्चों पर चुपचाप लेकिन निर्णायक दखल वाली है। 1989 बैच के पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी पराग जैन को नरेंद्र मोदी गवर्नमेंट ने RAW का अगला प्रमुख नियुक्त किया है। वे 1 जुलाई से दो वर्ष के कार्यकाल के लिए रवि सिन्हा की स्थान लेंगे।

वर्तमान में पराग जैन एविएशन रिसर्च सेंटर (ARC) के प्रमुख हैं। यहीं से इजरायली मॉडल पर काम करते हुए RAW की ‘हवाई नज़र शाखा’ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाक में आतंक के अड्डों और सैन्य हलचल की बहुत परफेक्ट जानकारी जुटाई थी। इस खुफिया इनपुट के बिना वह ऑपरेशन संभव नहीं था।
पंजाब आतंकवाद के दौर से लेकर कनाडा तक का सफर
उनका करियर बताता है कि वे मैदान के खिलाड़ी हैं। जब पंजाब में उग्रवाद चरम पर था तब पराग जैन बठिंडा, मानसा और होशियारपुर जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात रहे। वे SSP चंडीगढ़ और DIG लुधियाना भी रहे। यही दौर था जब उन्होंने खुफिया नेटवर्क और जमीनी पकड़ मजबूत की जो आज उनके सबसे बड़े हथियार माने जाते हैं।
जम्मू-कश्मीर, अनुच्छेद 370 और बालाकोट में सीधी टक्कर
RAW के साथ उनका रिश्ता नया नहीं है। जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के समय और बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान भी वे RAW की ऑपरेशनल कमान का हिस्सा रहे। यही नहीं श्रीलंका और कनाडा जैसे विदेश पोस्टिंग में भी उन्होंने हिंदुस्तान के हितों को मजबूती से संभाला।
कनाडा में खालिस्तान का उभार- पहले दी थी चेतावनी
कनाडा में खालिस्तानी नेटवर्क पर नजर रखने की जिम्मेदारी पराग जैन को ही मिली थी। वहीं से उन्होंने गवर्नमेंट को समय रहते चेताया था कि यह ‘समर्थन का आंदोलन’ नहीं बल्कि अब एक सशस्त्र खतरे में परिवर्तित हो रहा है। आज जब कनाडा-भारत रिश्तों में विवाद है तब पराग जैन की चेतावनी एक बार फिर चर्चा में है।
कम बोलने वाले, सधे हुए अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत: ग्राउंड इंटेल
पराग जैन दिखने में सिंपल, मीडिया से दूर और बयानबाजी से तो कोसों दूर रहते हैं। लेकिन उनकी पहचान है जमीन पर उपस्थित एजेंट नेटवर्क को संगठित करना, क्षेत्रीय भाषा, व्यवहार और संस्कृति को खुफिया तंत्र से जोड़ना। यही कारण है कि तकनीकी नज़र (टेक इंटेलिजेंस) से आगे बढ़कर वे ‘लोगों से जुड़कर जानकारी’ जुटाने के लिए जाने जाते हैं

