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Labor Unions Strike: 20 मई के दिन काम-काज ठप कर सकते हैं मजदूर

Labor Unions Strike: निजीकरण और श्रम संहिताओं की वजह से राष्ट्र का मजदूर गुस्से में है समाचार है कि 20 मई 2025 को देशभर के मजदूर संगठनों ने निजीकरण और श्रम संहिताओं के विरुद्ध एक ऐतिहासिक स्ट्राइक करने जा रहा है इस स्ट्राइक का उद्देश्य केंद्र गवर्नमेंट की कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों और मजदूर विरोधी फैसलों के विरुद्ध विरोध जताना है

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हड़ताल का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

केंद्रीय मजदूर संगठनों और विभिन्न स्वतंत्र क्षेत्रीय महासंघों ने एक राष्ट्रीय मजदूर सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें दो महीने के लंबे अभियान की योजना बनाई गई इस अभियान का समाप्ति 20 मई को देशव्यापी स्ट्राइक से होगा मजदूर संगठनों के नेताओं ने बोला कि यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा और श्रमिकों और किसानों के राष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक संघर्षों की आरंभ होगी

श्रमिक संगठनों की मुख्य मांगें

इस सम्मेलन में कई प्रमुख मजदूर संगठनों के नेताओं ने भाग लिया इनमें इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल हैं इन संगठनों ने केंद्र गवर्नमेंट की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कई जरूरी मांगें उठाईं

  • श्रम संहिताओं का विरोध: श्रमिक संगठनों का इल्जाम है कि गवर्नमेंट मजदूरों के अधिकारों के विरुद्ध श्रम संहिताओं को समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है, जो श्रमिकों के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है
  • निजीकरण पर रोक: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण रोकने की मांग की गई है, क्योंकि यह मजदूरों के रोजगार सुरक्षा को खतरे में डालता है
  • न्यूनतम वेतन वृद्धि: न्यूनतम मासिक वेतन को बढ़ाकर 26,000 रुपये करने की मांग की गई है, जिससे मजदूरों का जीवन स्तर सुधार सके
  • पेंशन योजना में सुधार: कर्मचारी पेंशन योजना के अनुसार न्यूनतम मासिक पेंशन को 9,000 रुपये करने की भी मांग की गई है
  • भारतीय श्रम सम्मेलन का नियमित आयोजन: भारतीय श्रम सम्मेलन के नियमित सत्र आयोजित करने की मांग की गई है ताकि मजदूरों की समस्याओं पर ध्यान दिया जा सके और उनके अधिकारों की रक्षा की जा सके

केंद्र गवर्नमेंट की नीतियों पर आरोप

श्रमिक नेताओं ने इल्जाम लगाया कि केंद्र गवर्नमेंट की नीतियां कॉरपोरेट समर्थक और मजदूर विरोधी हैं, जिससे बेरोजगारी, गरीबी और असमानता बढ़ी है इन नीतियों के चलते मजदूरों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है

20 मई की स्ट्राइक का महत्व

इस स्ट्राइक को लेकर मजदूर संगठनों का मानना है कि यह एक जरूरी कदम है, जो ना सिर्फ़ श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार की दिशा में भी सहायता करेगा यह स्ट्राइक गवर्नमेंट के विरुद्ध एक मजबूत संदेश है कि श्रमिकों को उनके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता

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